BHARTIYA NARI SANT PARAMPARA

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-510-1

Author:BALDEV WANSHI

Pages:

MRP:Rs.250/-

Stock:In Stock

Rs.250/-

Details

भारतीय अमर नारी सन्तों ने समाज की जड़ता को तोड़ने की खातिर, जाति-पाँति, ऊँच-नीच, साम्प्रदायिकतापूर्ण भेदभाव को मिटाने के लिए बड़ी गहरी चोटें दी हैं। पुरुष सन्तों से भी गहरी-गम्भीर! क्योंकि उन्होंने दलित वर्ग के पुरुषों से भी अधिक घिनौने अपमान, लांछन, भूख और अन्याय के दंश सहे हैं। वेद कालीन समता, स्वतन्त्राता, सम्मान व शिक्षा के अधिकारों के क्रमशः खोते जाने और अज्ञानता (आत्म-अज्ञानता-वेदज्ञान वंचित), अविद्या के गहन अन्धकार में धकेल दिये जाने के बाद, नारी मात्रा को भोग्य पदार्थ एवं क्रय-विक्रय की वस्तु बल्कि, इससे भी नीचेµ‘पाँव की जूती’ बना दिये जाने की घोर जलालतभरी, नारकीय स्थितियों को भोगना पड़ा। इस कारण विवशता में ही सही चुपचाप, खामोश रहकर समाज को, उक्त स्थितियाँ रचने के कारण, नंगा किया। उन्होंने घर छोड़ दिये, अकेली हो गयीं पर झुकी नहीं। पुरुष सन्त जो प्रायः समाज के निम्न, दलित, उपेक्षित वर्ग से आते हैं, उन्हीं के संग साथ में रह कर भी नारी सन्तों ने भगवान को अपनी, अपने वर्ग की, आपबीती भी सुनाई, मुक्ति की गुहार भी लगाई। भगवान को उलाहने भी दिये कि कैसे मनुष्यों की दुनिया में उसने उन्हें धकेल दिया। नारी सन्त तो दलितों की भी दलित हैं। उनकी यातनाएँ तो दोहरी-चौहरी हैं। किन्तु अपनी और समूचे मानव समाज की मुक्ति का मार्ग उन्होंने दिखायाµआत्मछन्द को उपलब्ध करके, स्वच्छन्द हो जाना है, मुक्त हो जाना है।

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About the writer

BALDEV WANSHI

BALDEV WANSHI जन्म: 1 जून, 1938 को मुलतान शहर (अब पाकिस्तान में) शिक्षा: एम. ए. हिन्दी, पीएच.डी. कृतित्व: पन्द्रह कविता संग्रह, चौदह आलोचना पुस्तकें, बीस सम्पादित पुस्तकें, चार भाषा आन्दोलन पर तथा पाँच बालोपयोगी पुस्तकें, दो नाटक। सन्त मलूकदास तथा सन्त दादू ग्रन्थावलियाँ, सन्त, सन्त मीराबाई, सन्त सहजो कवितावलियाँ। सन्त कबीर पर पाँच पुस्तकें तथा भारतीय संत परम्परा। सन्त पुस्तक माला का लेखन-सम्पादन-समन्वय के अन्तर्गत इक्कीस पुस्तकें प्रकाशित। सम्मान-पुरस्कार: विभिन्न अकादमियों, संस्थाओं, विश्वविद्यालयों द्वारा सम्मानित। छह पुस्तकों पर केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा पुरस्कृत। कबीर शिखर सम्मान, मलूक रत्न सम्मान, दादू शिखर सम्मान आदि। यात्राएँ: ‘विश्व रामायण सम्मेलन’ तथा कबीर चेतना-यात्रा (विदेश) मारीशस, हालैंड, इंगलैंड, बेल्जियम, नेपाल आदि। कार्यभार: ‘विश्व कबीरपन्थी महासभा’ के अध्यक्ष, ‘अखिल भारतीय श्री दादू सेवक-समाज’ के महानिदेशक, सन्त साहित्य अकादमी के अध्यक्ष। सम्पर्क: बी-684, सेक्टर-49, सैनिक कॉलोनी, फरीदाबाद-121001।

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Divesh

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