CHEKHOV KE SAAT NATAK

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-143-1

Author:DR. SABIRA HABEEB

Pages:312

MRP:Rs.425/-

Stock:In Stock

Rs.425/-

Details

चेखोव के सात नाटक

Additional Information

चेखोव ने जब यह नाटक लिखे तो 19वीं शताब्दी का अन्त हो रहा था। समाज तथा देश का स्वरूप बदलने में कुछ समय बाकी था इसलिए नयी के साथ-साथ पुरानी प्रथाएँ चली आ रही थीं-आलीजनाब, जनाब, जनाबेआली, श्रीमन्, महाशय, हुज़ूर का रिवाज़ था जो हमें 'शादी, जुबली, भालू, इवानोफ़' इत्यादि नाटकों में मिलता है। बात-बात पर उफ़ खुदा! हे भगवान् ! जहन्नुम में जाओ! शैतान तुम्हें समझे! कहा जाता था और यह शब्द तथा शब्द रचनाएँ हमें चेखोव के नाटकों के पात्र भी कहते सुनाई देते हैं। यहाँ पर किसी धर्म की तरफ़ इशारा नहीं। यह पात्र की एक आदत है, ख़ुशी, ग़म या ग़ुस्से के समय अनजाने में यह शब्द उसके मुँह से निकल जाते हैं। इसलिए कहीं पर 'उफ़ खुदा' कहीं 'बाई गाड' के रूप में उनका अनुवाद किया गया है। जहाँ तक मुहावरों तथा कहावतों का प्रश्न है तो हम जानते हैं कि यह नाटक रूसी भाषा में लिखे गये हैं जो संसार की सम्पन्न भाषाओं में से एक है। इसलिए उसकी अपनी प्रणाली, शब्द रचनाएँ, नियम हैं। मुहावरों तथा कहावतों का प्रश्न है तो हम जानते हैं कि यह नाटक रूसी भाषा में लिखे गये हैं जो संसार की सम्पन्न भाषाओं में से एक है। इसलिए उसकी अपनी प्रणाली, शब्द रचनाएँ, नियम हैं।

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DR. SABIRA HABEEB

DR. SABIRA HABEEB अनुवाद

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