Bhagyadajjukam Aur Dhoortsamagam

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-7055-167-6

Author:INDUJA AWASTHI

Pages:52

MRP:Rs.50/-

Stock:In Stock

Rs.50/-

Details

भगवदज्जुकम् और धूर्त्तसमागम

Additional Information

भगवदज्जुकम् और धूर्तसमागम संस्कृत के दो प्रहसन हैं जिनको लेकर हम आपके सम्मुख उपस्थित हो रहे हैं। भगवदज्जुकम् 7वीं शताब्दी में बोधायन द्वारा लिखा गया, पहले इसकी प्रस्तुति कूडिअट्टम् में होती रही थी, वहीं से इसके संबंध में पता चला, तबसे इसकी अनेक प्रस्तुतियां संस्कृत में और विभिन्न भाषाओं में अनुवाद में होती रही हैं। धूर्तसमागम तेरहवीं शताब्दी में श्री ज्योतिरीश्वर द्वारा लिखा गया। यह वह समय था जब अपभ्रंश के पश्चात् देशी भाषाओं का उदय हो रहा था, इसी से ज्योतिरीश्वर ने धूर्तसमागम में मैथिली के गीतों का समावेश भी किया। समय के इतने अंतराल के बावजूद इन दोनों प्रहसनों या संगीतकों के पात्र मिलते-जुलते हैं। इसका प्रमुख कारण तो यही है कि संस्कृत में संकीर्ण प्रकार के प्रहसन में वेश्या, धूर्त, लंपट और चोर जैसे पात्र अवश्य रखे जाते हैं। इन दोनों प्रहसनों में साधु और उनके शिष्य प्रमुख पात्र हैं। इनके माध्यम से धर्म के झूठे दंभ का उपहास किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि सातवीं शताब्दी से तेरहवीं शताब्दी तक की इस लंबी कालावधि में समाज के धूर्त और दंभी वंचकों की ओर नाट्यकारों का ध्यान जाता रहा और उन्होंने समाज की उन बुराइयों पर ध्यान आकृष्ट करवाया।

About the writer

INDUJA AWASTHI

INDUJA AWASTHI

Books by INDUJA AWASTHI

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality