BAMANBARA

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-495-1

Author:RAMNATH CHAHWAN

Pages:108

MRP:Rs.125/-

Stock:In Stock

Rs.125/-

Details

बामनबाड़ा

Additional Information

इस देश की समाज रचना वर्ण और जाति व्यवस्था में बंटी हुई हैं। मनुष्य और मनुष्य के बीच ये जो वर्ण, धर्म, वेश जाति की दीवारों खड़ी की गई हैं, वे कृत्रिम हैं और मनुज विरोधी हैं। जाति-विहीन समाज बनाना हो तो, अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन देना पड़ेगा। डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर ने जाति नष्ट करने के लिए यही महत्वपूर्ण मार्ग बतलाया था। प्रस्तुत नाटक इसी समस्या से जूझता है। विवेक संपन्न तथा मनुष्य धर्म को स्वीकार चुकी एक युवती एक बुद्धिमान दलित युवक से विवाह करने का निर्णय लेती है। दोनों विवाह कर लेते हैं। उसके बाद उनके जीवन में जो तूफ़ान उठता है, उसको विविध नाट्यमय प्रसंगों द्वारा साकार किया गया है। यह समस्या नाटक' महाराष्ट्र के रंगकर्मियों को आज भी आकृष्ट करता है। रंगमंच पर नाटक कई बार खेला गया है।

About the writer

RAMNATH CHAHWAN

RAMNATH CHAHWAN श्री रामनाथ चव्हाण मराठी के जाने-माने नाटककार, ललित गद्य लेखक तथा रेखाचित्रकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनका एक उपन्यास, तीन नाटक, दो रेखाचित्र के संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। मीनाक्षीपुरम की धर्मपरिवर्तन से संबंधित घटना पर इनका एक नाटक साक्षीपुरम् काफी चर्चित रहा। इसका हिंदी अनुवाद प्रकाशित है। सृजनशील लेखक के साथ-साथ चव्हाण उच्च कोटि के संशोधक भी हैं। महाराष्ट्र में स्थित 42 जनजातियों का अध्ययन मात्र तीन खंडों में प्रस्तुत कर चुके हैं। ग्रंथ रचनाकार के रूप में महाराष्ट्र शासन द्वारा दो बार पुरस्कृत हो चुके हैं। चित्रकार, अभिनेता, लेखक, वक्ता तथा संशोधक के रूप में आप अपनी स्वतंत्र पहचान बना चुके हैं। इस नाटक के अनुवादक डॉ. सूर्यनारायण रणसुभे हिंदी के समीक्षक, लेखक तथा अनुवादक के रूप में ख्यात हैं। आपकी बीस से अधिक रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। विशेषतः मराठी के दलित साहित्य को हिंदी में ले आने का ऐतिहासिक कार्य आपने किया है।

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