JAHAR-E-ISHQ

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-040-9

Author:KAIFI AAZMI

Pages:112

MRP:Rs.150/-

Stock:In Stock

Rs.150/-

Details

ज़हर-ए-इश्क़ (मिर्ज़ा शौक की मूल मस्नवी व उसका नाट्य रूपांतर)

Additional Information

मस्नवी 'ज़हर-ए-इश्क़' नवाब मिर्ज़ा शौक़ लखनवी की तीन अमर मस्तवियों में से एक है। प्रेम में विछोह का ऐसा मातक वर्णन विरल है। इस पारंपरिक विषय पर उर्दू में अनेक मस्नवियाँ लिखी गई हैं लेकिन ऐसी भाव प्रवणता आर हृदयगाह्यता शायद ही कहीं और मौजूद हो। इसकी संवेदना में युवा हृदय की अभिलाषाओं का ज्वार है, अधूरे सपनों का विलाप है और प्रेम की लौ को आंधियों के कहर से बचा पाने की विकलता है। अपनी परिणति में यह एक दुःखांत रचना है। प्रिय मिलन से वंचित नायिका की मृत्यु हमारे मन को झकझोर देती है। मिर्ज़ा 'शौक़', नवाब वाज़िदअली शाह के ज़माने के मशहूर शाइर थे। मनस्वी 'ज़हर-ए-इश्क़' की रचना 1860ई. में हुई। इस मस्नवी का एक अन्य पाठ भी बनता है जिसमें हम उस समय के लखनऊ की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थिति से रू-ब-रू हो सकते हैं। 'शौक़' का उद्देश्य समाज सुधार नहीं था, न ही उनके रसिक स्वभाव से सुधारवाद का तालमेल बैठता था। शाइर अपने प्रेम की व्यथा-कथा के निमित्त से भोग विलास में लिप्त एक पतनोन्मुख समाज के चित्र उभारता गया है। उस दौर में लखनऊ के जीवन की यह विडम्बना थी कि मुर्गे, बटेरें आदि लड़ाने की कुरुचि नवाबों और अमीर-उमराव के प्रभाव से जन साधारण में भी पैदा हो गई थी। मुर्गे की जीत और हार जीवन-मरण का प्रश्न बन चुकी थी। मनस्वी मुगों की लड़ाई से ही खुलती है। शुरू में लगता है कि जैसे हम कोई नाटक पढ़ रहे हों। नाट्य-तत्त्व के साथ-साथ यहाँ हास्य-विनोद का भी समावेश है। कहानी के बीच में लखनऊ के परिवेश की झलक भी जा ब जा मिलती है। 'शौक़' ने लखनऊ में नौचंदी के मेले, हज़रत अब्बास की दरगाह और हुसैनाबाद में लोगों के जमघट को करीब से देखा था। ये तमाम चित्र मस्नवी के बीच-बीच में आते हैं। कैफ़ी साहब ने इस मस्नवी में छुपे हुए नाटक को पाठकों के सामने उजागर कर दिया है। इस काम में एक बड़े कलाकार की सर्जनात्मक प्रतिभा झलकती है। रंगमंच की अपेक्षाओं के अनुरूप दृश्य विधानों और मंच निर्देशों की परिकल्पना की गई है। एक क्लासिक की नये ढंग से पुनर्प्रस्तुति एक कठिन उपक्रम है। इस नाट्य रूपांतर के ज़रिए पाठक मनस्वी 'ज़हर-ए-इश्क़' का ज़्यादा सहज रूप में आस्वादन कर सकेंगे। निस्संदेह कैफ़ी साहब द्वारा दिये गये इस ड्रामाई रूप का रंगमंय की दुनिया में स्वागत होगा। (इसी पुस्तक से...)

About the writer

KAIFI AAZMI

KAIFI AAZMI परिचय जन्म : 1919, ग्राम मज़वाँ, आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश भाषा : हिंदी, उर्दू मुख्य कृतियाँ आख़िरे-शब, झंकार, आवारा सज़दे निधन 10 मई 2002

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