HUMA KO UDH JANE DO

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-785-3

Author:MEERA KANT

Pages:96

MRP:Rs.150/-

Stock:In Stock

Rs.150/-

Details

हुमा को उड़ जाने दो

Additional Information

नाटक ‘हुमा को उड़ जाने दो' हुमायूँ के जीवन को उसके पूर्ण विराम से पलटकर देखने का प्रयास भर है। हुमायूँ-एक ऐसा मुग़ल बादशाह जिसने अपनी करनी और यहाँ तक कि नाम में भी अन्तर्विरोधों को जिया। हुमायूँ का शाब्दिक अर्थ है-वह शख्स जिसके सिर पर हुमा अर्थात् भाग्य लाने वाले एक ख़याली परिन्दे की छाया पड़ी हो यानी भाग्यवान। अपने नाम के विपरीत बादशाह हुमायूँ के जीवन का घटना-क्रम तो उसे एक बदक़िस्मत बादशाह करार देता है, उसकी मौत भी एक बदक़िस्मत मौत साबित हुई। पहले पुस्तकालय की सीढ़ियों से फिसलकर घायल होना फिर मौत के बाद मय्यत उठने का लगभग दो सप्ताह का लम्बा इन्तज़ार! चारों ओर एक भ्रम की स्थिति कि बादशाह मृत हैं या जीवित! यानी जीवन ने लगातार मृत्यु की छाया को जिया और मृत्यु ने जीवन के भ्रम को! 'हुमा को उड़ जाने दो' अपने युग की भाषा में पगा होने पर भी ऐतिहासिक नाटक नहीं बल्कि इतिहास के बेतरतीब तिनकों को बटोरकर काल्पनिक पक्षी हुमा की भाँति बनाया गया एक काल्पनिक नीड़ है। मीरा कांत का यह नाटक हुमायूँ की मौत को ज़िन्दगी की शक्ल देने के इस सियासी खेल के दर्द की सशक्त अभिव्यक्ति है। एक ऐसा सियासी खेल जहाँ ज़िन्दगी और मौत दोनों सिर्फ़ अलग-अलग दो मोहरे होते हैं और जो खेल सदियों से अलग-अलग साम्राज्यों व हुकूमतों में प्रायः खेला जाता रहा है।

About the writer

MEERA KANT

MEERA KANT 1958 में श्रीनगर में जन्म। प्रकाशन : अब तक 'हाइफ़न' और 'कागज़ी बजे (कहानी-संग्रह); 'ततःकिम' और 'उर्फ हिटलर (उपन्यास); 'इंहामृग', 'नेपथ्य राग', 'भवनेश्वर दर भुवनेश्वर' और 'कन्धे पर बैठा था शाप' (नाटक), 'पुनरपि दिव्या' (नाट्य रूपान्तर) तथा अन्तरराष्ट्रीय महिला दशक और हिन्दी पत्रकारिता' शोधपरक ग्रन्थ। 'मीरा : मुक्ति की साधिक' का सम्पादन। 'ईहामृग' कालिदास नाट्य समारोह, उज्जैन में: 'नेपथ्य राग' साहित्य कला परिषद के तत्वावधान में तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के भारत रंग महोत्सव 2004 में मंचित। ‘काली बर्फ़' तथा 'दिव्या' का श्रीराम सेंटर, दिल्ली; 'भुवनेश्वर दर भुवनेश्वर' का शाहजहाँपुर और व्यथा सतीसर' का जम्मू में मंचन। पुरस्कार सम्मान : फ़िल्म लेखन के लिए वर्ष 1992 में स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर सेः 'नेपथ्य राग' के लिए वर्ष 2003 में मोहन राकेश सम्मान (प्रथम पुरस्कार); 'ईहामृग' के लिए सेठ गोविन्द दास सम्मान (2003); 'ततःकिम्' के लिए। अम्बिकाप्रसाद दिव्या स्मृति सम्मान (2004): 'भुवनेश्वर दर भुवनेश्वर के लिए निष्ठा सांस्कृतिक मंच की ओर से सर्वश्रेष्ठ कथानक पुरस्कार (2006) एवं हिन्दी अकादमी, दिल्ली के साहित्यकार सम्मान (2005-06) से अलंकृत।

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