JI JAISI AAPKI MARZI

Format:Paper Back

ISBN:978-81-8143-823-2

Author:NADIRA ZAHEER BABAR

Pages:42

MRP:Rs.95/-

Stock:In Stock

Rs.95/-

Details

जी जैसी आपकी मर्जी

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पौराणिक ज़माने से ही स्त्री को रौंदा जाता रहा है। उसके व्यवहार पर प्रश्नचिन्ह लगाये जाते हैं। उसे आलोचनाओं का शिकार होना पड़ता है, उसे विभिन्न प्रकार की प्रताड़नाएँ दी जाती हैं। आज के समाज में भी “स्त्री स्वतंत्रता” बड़ा ही संदिग्ध शब्द है। पढ़ने का हक, आर्थिक स्वतंत्रता और अपने फैसले खुद लेने का हक, आज भी ज़्यादातर स्त्रियों के लिए एक दूर से दिखने वाला सपना मात्र ही है। उपरोक्त समस्याओं से हमारा पूरा समाज भलीभाँति परिचित है लेकिन फिर भी इसे अनदेखा कर दिया जाता है या इसे बिना प्रश्न किये स्वीकार कर लिया जाता है। ये नाटक नारी-मुक्ति आंदोलन से कहीं ज़्यादा बड़ा है। ऐसा नहीं कि हम उस आंदोलन के विरुद्ध हैं लेकिन ऐसे बहुत से रूढ़िवादी मुद्दे हैं जिन्हें हमें देखना और बदलना होगा। अपने समाज में स्त्री की स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए ये नाटक कोई सनसनी पैदा करने के लिए नहीं बल्कि जो हमारे बहत से सामाजिक और राजनीतिक मददे इस स्थिति से जुड़े हैं उन पर प्रकाश डालने की एक कोशिश, एक पहल है। मैंने ये नाटक पूरे दृढ़ विश्वास से लिखा है और मैंने पाया कि मेरे आसपास के लोगों ने, एक्टर्स, दर्शक या जिसने भी इसे सुना या देखा या तो ख़ुद ये सब अनुभव किया है या अपने आसपास इन घटनाओं को घटते देखा और सुना है। मेरा अटूट विश्वास है कि ये नाटक हमारे समाज की मानसिकता को बहुत सच्चाई से प्रतिबिम्बित करता है। चाहे वो धार्मिक मान्यताएँ हों जो स्त्री का दम घोंट देती हैं या फिर हमारी रूढ़िवादी परंपराएँ। हम ये नाटक बहुत ही खुशी और उम्मीद के साथ आपके सामने रख रहे हैं कि आप सब स्त्री और पुरुष, हमारे इस प्रयास को समझेंगे और सराहेंगे। हमारा ये नाटक आप सबकी आत्मा के किसी एक हिस्से को ज़रूर करीब से छुएगा और सोचने और सकारात्मक कदम उठाने पर मजबूर करेगा। - नादिरा जहीर बब्बर

About the writer

NADIRA ZAHEER BABAR

NADIRA ZAHEER BABAR रंगमंच सिनेमा और टेलीविजन की मशहूर कलाकार नादिरा जहीर बब्बर भारतीय कलाजगत में अपने कलाकर्म और सामाजिक सक्रियता के कारण जानी जाती हैं। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की स्नातक और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित नादिरा ने अपनी संस्था ‘एकजुट’ के माध्यम से रंगमंच के क्षेत्र में कई नये प्रतिमान कायम किए हैं। ‘आथेलो’, ‘तुगलक’, ‘जसमा ओढ़न’, ‘संध्या छाया’, ‘बेगम जान’ आदि नाटकों में केन्द्रीय भूमिकाएं निभाने के अलावा उन्होंने और ऐसे नाटकों का निर्देशन किया है जो भारतीय रंगमंच में अपनी नयी पहल कदमी के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। सुप्रसिद्ध चित्रकार मक़बूल फ़िदा हुसैन के जीवन पर आधारित ‘पेंसिल से ब्रश तक’, धर्मवीर भारती की कालजयी कृतियों ‘कनुप्रिया’ एवं ‘अंधायुग’ पर आधारित ‘इतिहास तुम्हें ले गया कन्हैया’ और उत्तर पूर्व की पृष्ठभूमि पर ‘ऑपरेशन क्लाउडबर्स्ट’ सहित उन्होंने दर्जनों ऐसे नाटकों का निर्देशन किया है जो भारतीय रंगमंच में ऐसा कुछ नया जोड़ते हैं जिससे नयी पीढ़ी प्रभावित हो सकती है। प्रगतिशील लेखक संघ के संस्थापक कामरेड सज्जाद ज़हीर की बेटी और मशहूर नेता-अभिनेता की राज बब्बर की पत्नी नादिरा का जन्म 20 जनवरी 1948 को हुआ था। इन दिनों वे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय सोसायटी की सम्मानित सदस्य हैं।

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