JIS LAHORE NAI DEKHYA O JAMYAI NAI

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ISBN:978-93-5000-313-8

Author:ASGHAR WAJAHAT

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MRP:Rs.150/-

Stock:Out of Stock

Rs.150/-

Details

जिस लाहौर नइ देख्या ओ जम्याइ नइ

Additional Information

असगर वजाहत हिन्दी के उन चुनिन्दा रचनाकारों में से हैं जिन्होंने हिन्दी के दायरे का सर्जनात्मक विस्तार किया है और अपनी बेहतरीन रचनाओं से उसे भारतीय साहित्य की श्रेष्ठ परम्पराओं के समकक्ष ला खड़ा किया है. अगर गहराई से देखा जाय तो असगर वजाहत के समूचे साहित्य में एक दुर्लभ मानवीय सम्वेदना परिलक्षित होती है.

About the writer

ASGHAR WAJAHAT

ASGHAR WAJAHAT जन्म : 5 जुलाई 1946, फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) भाषा : हिंदी विधाएँ : उपन्यास, कहानी, नाटक मुख्य कृतियाँ उपन्यास : सात आसमान, कैसी आगी लगाई, रात में जागने वाले, पहर-दोपहर, मन माटी, चहारदर, फिरंगी लौट आये, जिन्ना की आवाज, वीरगति नाटक : जित लाहौर नईं वेख्या वो जन्‍म्‍या ई नईं, अकी, समिधा नुक्कड़ नाटक : सबसे सस्ता गोश्त कहानी संग्रह : मैं हिंदू हूँ, दिल्ली पहुँचना है, स्वीमिंग पूल, सब कहाँ कुछ यात्रा संस्मरण : चलते तो अच्छा था, इस पतझड़ में आना आलोचना : हिंदी-उर्दू की प्रगतिशील कविता सम्मान कथा क्रम सम्मान, हिंदी अकादमी, इंदु शर्मा कथा सम्मान संपर्क 79, कला विहार, मयूर विहार, फेज 1, दिल्ली-110091

Customer Reviews

Aditi

Enjoyed a lot
Really a beautiful expression of human values : love faith respect , which are above the cynicism of religion. Tries us to realize the similar thing happened on both sides of border with roles exchanged. The love of the Hindu women for Lahore and Pakistani family with Lucknow shows their bonding with the local culture of the city, which is the strength of India. This boding is above cast and religion. Every secular person should read the book or watch the play
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