MERO MAN ANAT KAHAN SUKH PAVEIN

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-652-8

Author:DR. RAJMANI SHARMA

Pages:136

MRP:Rs.200/-

Stock:In Stock

Rs.200/-

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मेरो मन अनत

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DR. RAJMANI SHARMA

DR. RAJMANI SHARMA डॉ. राजमणि शर्मा 2 नवम्बर, 1940 को लम्भुआ, सुलतानपुर (उ.प्र.) गाँव की माटी में जन्म। प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा के पश्चात् काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी), भाषा विज्ञान में द्विवर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा एवं पीएच.डी. (हिन्दी) कृतकार्य आचार्य, हिन्दी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय। संप्रति-स्वतंत्र लेखन, व्याख्यान। आदिकालीन, आधुनिक तथा समकालीन हिन्दी साहित्य, भाषा-बोली-अध्ययन, अनुवाद विज्ञान, कोश विज्ञान, जनसंचार माध्यम, कम्प्यूटर और अनुप्रयुक्त हिन्दी में विशेषज्ञता। 'प्रसाद का गद्य-साहित्य', 'आधुनिक भाषा विज्ञान', 'हिन्दी भाषा : इतिहास और स्वरूप', 'भारतीय प्राणधारा का स्वाभाविक विकास : हिन्दी कविता', 'मेरो मन अनत कहाँ सुख पावै...', 'दलित चेतना की कहानियाँ : बदलती परिभाषाएँ' (वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली), 'काव्य भाषा : रचनात्मक सरोकार', 'बलिया का विरवा : काशी की माटी', 'अनवाद विज्ञान : प्रायोगिक संदर्भ' (संजय बुक सेण्टर, वाराणसी), 'अनुवाद विज्ञान' (हरियाणा साहित्य अकादमी)। काव्यभाषा : रचनात्मक सरोकार उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा आचार्य रामचन्द्र शुक्ल नामित समीक्षा पुरस्कार से पुरस्कृत। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा समस्त भारत के स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं के लिए हिन्दी पाठ्यक्रम निर्मिति हेतु गठित पाठ्यक्रम विकास केन्द्र का संयोजक एवं संयुक्त समन्वयक। पाठ्यक्रम स्वीकृत प्रचारित। हिन्दी साहित्य की विभिन्न विधाओं, भाषा विज्ञान, अनुवाद विज्ञान और हिन्दी की स्थिति-परिस्थिति एवं भविष्य, हिन्दी अनुप्रयोग पर विभिन्न विश्वविद्यालयों में व्याख्यान आलेख।

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