KAVITA KA VARTMAN

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-742-6

Author:DR. P. RAVI

Pages:

MRP:Rs.595/-

Stock:Out of Stock

Rs.595/-

Details

त्रिकालदर्शी कवि इतिहास को बाँचकर, भविष्य का स्वप्न गढ़ते हुए वर्तमान के गलियारे में खड़ा रहता है। वर्तमान से बढ़कर वह भविष्य के प्रति उद्विग्न होता है और वही उद्विग्नता कविता में तब्दील होती है। ऐसी कविता की मृत्यु कभी नहीं होती है और जिसका भविष्य पुख्ता भी होता है। ‘कविता का वर्तमान’ इसकी जाँच-पड़ताल करती है। इस पुस्तक में कविता और जीवन को निराधार देखने की प्रवृत्ति नहीं, पक्के नजश्रिए से जीवन, समाज एवं राष्ट्र को ही नहीं, सम्पूर्ण विश्व को देखती कविताओं की परख है। वर्तमान कविताओं की जो आलोचनाएँ इसमें समाहित हैं। वे बयान करती हैं कि नव उपनिवेशवाद, साम्प्रदायिकता, अपसंस्कृति, उपभोक्तावाद, विकल्पहीनता एवं विचारधारा को लेकर अफवाहें, पर्यावरण व पारिस्थितिक संकट, स्त्री एवं दलित प्रश्न सरीखे भीषण यथार्थ की अभिव्यक्ति समकालीन कवि किस प्रकार करते हैं।

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About the writer

DR. P. RAVI

DR. P. RAVI जन्मः सन् 1960 में केरल के कण्णूर जिले में। प्रकाशित रचनाएँः विभाजन और भारतीय कहानियाँ (केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय से पुरस्कृत), समकालीन हिन्दी उपन्यासः समय और संवेदना (सम्पादन सहयोग), उत्तर औपनिवेशिक विमर्श और कविता (सम्पादक)। विभिन्न पत्रा-पत्रिकाओं में कई आलेख प्रकाशित। सम्प्रतिः एसोसिएट प्रोफेसर हिन्दी विभाग श्रीशंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय कालटी, केरल-683574

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