HIINDI KAHANI : SANRACHNA AUR SAMVEDNA

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-469-5

Author:DR. SADHANA SHAH

Pages:130

MRP:Rs.200/-

Stock:In Stock

Rs.200/-

Details

आधुनिक कहानियाँ पढ़ते समय एक बात का निरन्तर अनुभव होता रहा है कि ये कहानियाँ स्वाधीनता पूर्व की कहानियों से अलग हैं। इस अलगाव का मुख्य कारण हमारी आधुनिक भावभूमि है। इस भावभूमि को समझे बिना आधुनिक कहानी समझी नहीं जा सकती। आधुनिक भावबोध के कारण नयी कहानी में आशय, विषय और शैलीगत परिवर्तन हुए हैं। नयी कहानी के अध्ययन के दौरान अनुभव हुआ कि नयी कहानी में नवीनता तो है पर पुराने से वह पूरी तरह मुक्त नहीं हो पायी है। यही इसकी कमजोरी और सीमा है। नयी कहानी में आये ठहराव को आगामी दशकों की कहानियों ने तोड़ा है। कहानी की विकास यात्रा में अकहानी व सचेतन कहानी जैसे आन्दोलन उभरे। नयी रचनाशीलता की खूब चर्चा तो रही, पर इसकी भी कमजोरियाँ सामने आयीं। आगामी दशक में कहानी की रचनाधार्मिकता ने एक और करवट ली। उसका नया तेवर सामने आया, जिसे आठवें दशक की कहानी के नाम से जाना गया है। इन तीनों दशकों की कहानियों के अध्ययन के दौरान अनुभव किया गया कि इन कहानियों में चित्रित आशय और विषय में तो काफी समानता है, लेकिन उनके निरूपण में काफी अन्तर है। दशक निहाय इस अन्तर को बारीकी से समझना एक दिलचस्प बात है। पुस्तक लेखन के दौरान इस दिलचस्प बात का खूब मज़ा लिया।

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About the writer

DR. SADHANA SHAH

DR. SADHANA SHAH जन्म: 1949 आन्ध्र प्रदेश शिक्षा: स्कूली शिक्षा गुजराती में एम.ए. (हिन्दी) प्रथम श्रेणी, गुणवत्ता सूची में सर्वतृतीय, 1971 मराठबाड़ा विश्वविद्यालय, औरंगाबाद; पी-एच.डी., 1976 मराठबाड़ा विश्वविद्यालय, औरंगावाद; डी.लिट्., 1997 तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर। प्रकाशित कृतियाँ: नयी कहानी में आधुनिकताबोध, 1978, पुस्तक संस्थान 109/50, नेहरू नगर कानपुर; कहानी: पुरानी बनाम नयी, 1992, विचार प्रकाशन, औरंगाबाद। डॉ. भगवानदास वर्मा के व्याख्यानों का संकलन-संयोजन। कृतियाँ: मध्ययुगीन बोध: मानवीय अर्थवत्ता (महराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी, मुम्बई द्वारा पुरस्कृत) जननायक राम। केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, भारत सरकार, नयी दिल्ली द्वारा कहानी: पुरानी बनाम नयी पुस्तक को अहिन्दी भाषी हिन्दी लेखक पुरस्कार प्राप्त (1992-1993)। साहित्यिक तथा सांस्कृतिक पत्र-पत्रिकाओं में लेखन। शैक्षिक तथा सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता। रविवारीय संस्कार शाला: अपना क्लब का संचालन-संयोजन। स.भु. कला और वाणिजय महाविद्यालय, औरंगाबाद के हिन्दी विभाग में गत 24 वर्षों से कार्यरत।

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