BIRSA MUNDA AUR UNKA AANDOLAN (1872-1901)

Format:Hard Bound

ISBN:81-7055-788-7

Author:K.S. SINGH

Pages:350

MRP:Rs.350/-

Stock:Out of Stock

Rs.350/-

Details

बिरसा मुंडा और उनका आन्दोलन

Additional Information

इतिहास की मुख्य और प्रचलित धारा में हमेशा हाशिये पर रखा जाता रहा है अंग्रेजों के विरुद्ध होने वाला आदिवासियों और जनजातियों का संग्राम। अपने देश और अपने धरती पर अपने अधिकारों और सम्प्रभुता का यह महान संग्राम महज राजनीतिक सत्ताओं के लिए होने वाले संघर्षों से बिल्कुल भिन्न रहा है। कई रूपों में यह संघर्ष आज भी जारी है। इन सब में एक महत्त्वपूर्ण संग्राम था, बिरसा मुंडा के नेतृत्व में चलने वाला 'उलगुलान' जिसने अनेक लोकगाथाओं और किंवदंतियों को जन्म दिया। यह एक ऐसा आन्दोलन था। जिसमें राजनीति, समाज और संस्कृति के सभी सूत्र आपस में गुंथे हुए थे। सम्भवतः अभिलेखों से होकर लोकसाहित्य तक बिखरी हुई जितनी सामग्री इस आन्दोलन के बारे में उपलब्ध है, उतनी किसी अन्य के बारे में नहीं। जब बिरसा और उनके इस महान आन्दोलन पर यह पुस्तक मूलतः अंग्रेजी में प्रकाशित हुई थी, तब इसका गहरा प्रभाव सिर्फ़ आदिवासी आन्दोलन, झारखंड के साहित्य और समाज पर ही नहीं, बल्कि व्यापक रूप से समचे इतिहास लेखन के क्षेत्र पर पड़ा और बिरसा मुंडा का नायकत्व राष्टीय स्तर पर उभर कर सामने आया। प्रस्तुत संस्करण में बाद के परिवर्तनों और सन्दर्भो के अनुरूप कुछ नये विचार, नयी जानकारियाँ और कुछ महत्त्वपूर्ण सामग्री सम्मिलित है। आदिवासियों के महानायक बिरसा का उलगुलान अभी भी जारी है और उसकी प्रासंगिकता निरन्तर बनी हुई है।

About the writer

K.S. SINGH

K.S. SINGH जन्म : 1935, बिहार के एक आदिवासी इलाके में, जिला मुंगेर। लम्बे समय तक भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद 1984 से 1993 तक एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया के महानिदेशक। कृतियाँ : 'दि डस्ट स्टॉर्म एंड दि हैंगिंग मिस्ट', 'दि इंडियन फेमिन', 'कोलोनियल ट्रासंफार्मेशन ऑफ़ दि ट्राइबल सोसाइटी', 'ट्राइबल सोसाइटी इन इंडिया : एन एंथ्रोपो-हिस्टोरिकल पर्सपेक्टिव', डॉ. कुमार सुरेश सिंह ‘प्लेस नेम्स एंड पर्सनल नेम्स', 'एथिनीसिटी, आइडेंटिटी एंड डेपलेपमेंट', 'पीपुल ऑफ इंडिया'। सम्मान एवं अन्य : जवाहरलाल नेहरू फ़ेलोशिप 1970, ट्वेंटीथ सेंचुरी अचीवमेंट अवार्ड (अमेरिकन बायग्राफ़िकल इंस्टीट्यूट, 1993, इसी वर्ष जेनेवा में फील्ड रिसर्च तथा लेखन के लिए अन्तरराष्ट्रीय सम्मान, शिकागो वि.वि. द्वारा पोस्ट डॉक्टोरल फ़ेलोशिप आदि।) सदस्यताएँ : भारतीय जन-प्रशासन संस्थान, भारतीय इतिहास कांग्रेस, काउंसिल ऑफ़ सोशल एंड कल्चरल रिसर्च, इंडियन नेशनल ट्रस्ट ऑफ़ आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज के संस्थापक सदस्य, नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंस की आजीवन सदस्यता, आई.सी.एच.आर., काउंसिल ऑफ वीमेन स्टडीज़ की आजीवन सदस्यता तथा यूनेस्को के राष्ट्रीय कमीशन के सदस्य। लगभग 35 अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का सम्पादन, अनेक देशों की यात्राएँ, अन्तरराष्ट्रीय सेमिनारों में महत्त्वपूर्ण भागीदारी।

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