GO-VADH AUR ANGREZ

Format:Hard Bound

ISBN:81-7055-199-4

Author:DHARMPAL

Pages:184

MRP:Rs.200/-

Stock:In Stock

Rs.200/-

Details

लगभग 2000 वर्षों से यूरोप गोमांस का प्रमुख उपभोक्ता रहा है। इसलिए स्वाभाविक तौर पर यूरोपियों, विशेषकर अंग्रेजों ने अठारहवीं शताब्दी के शुरूआत से यानी भारत में बसने के साथ ही गोहत्या शुरू कर दी थी। शुरूआत में मारे जाने वाली गायों की संख्या अधिक नहीं रही होगी। लेकिन 18वीं सदी के अन्त तक बड़े पैमाने पर गौ-वध होने लगा, यूरोपीय तर्ज पर तीनों ब्रिटिश सेनाओं (बंगाल, मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी की सेना) के रसद विभागों ने देश के विभिन्न भागों में बड़े-बड़े कसाईख़ाने बनाये। इन हत्याओं के लिए बड़े पैमाने पर कसाइयों की भी आवश्यकता थी। मोटे तौर पर 1800 ई. से 1900 ई. तक कसाइयों की संख्या पाँच से दस गुनी हो गयी।

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