BHARTIYA VIVAH SANSTHA KA ITIHAS

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-114-6

Author:VISHWANATH

Pages:168

MRP:Rs.200/-

Stock:Out of Stock

Rs.200/-

Details

भारतीय विवाह संस्था का इतिहास का यह दूसरा संस्करण है। आद्य समाज के विकास के इतिहास के प्रति गहन अनुसंधानात्मक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण की परिचायक यह पुस्तक इतिहासाचार्य राजवाडे के व्यापक अध्ययन और चिन्तन की एक अनूठी उपलब्धि है। स्वर्गीय विश्वनाथ काशीनाथ राजवाडे के बारे में जैसा कि कहा गया है: ”जैसे ही उन्हें पता चलता कि किसी जगह पर पुराने (इतिहास सम्बन्धी) कागज-पत्र मिलने की सम्भावना है, वह धोती, लम्बा काला कोट, सिर पर साफा पहने, अपने लिए भोजन पकाने के इने-गिने बर्तनों का थैला कन्धे पर डाले निकल पड़ते और उन्हें प्राप्त करने के लिए अथक परिश्रम करते।” इसी परिश्रम का सुपरिणाम था-मराठों के इतिहास की स्रोत-सामग्री वाले मराठांची इतिहासाची साधने महाग्रंथ का 22 खंडों में प्रकाशन। वह संस्कृत भाषा और व्याकरण के भी प्रकांड पंडित थे, जिसका प्रमाण उनकी सुप्रसिद्ध कृतियाँ राजवाडे धातुकोश तथा संस्कृत भाषेचा उलगडा, आदि हैं।

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