GANDHI VICHAR AUR SAHITYA

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-173-8

Author:SUMAN JAIN

Pages:576

MRP:Rs.750/-

Stock:Out of Stock

Rs.750/-

Details

गाँधीजी के गद्य को देखने से सहज ही अनुभव होता है कि उनका गद्य सहज और बोधगम्य है। वाक्य बड़े और क्लिष्ट नहीं हैं। भाषा सीखने के लिए ऐसे ही गद्य की आवश्यकता है। गाँधीजी ने अपने गद्य में यथार्थ और बीभत्स दृश्यों का भी वर्णन किया है, क्योंकि उनके पास जो मूल तत्त्व था, वह था सत्य। सत्य कहीं भी हो, उसका उसी रूप में चित्रण उस व्यक्तित्व और लेखन का लक्ष्य था।

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