BAHURI AKELA : KUMAR GANDHARAV PAR KAVITAYEN AUR NIBANDH

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-485-9

Author:ASHOK VAJPEYI

Pages:116

MRP:Rs.125/-

Stock:In Stock

Rs.125/-

Details

बहुरि अकेला

Additional Information

कुमार गन्धर्व न सिर्फ़ भारतीय संगीत बल्कि समूची भारतीय संस्कृति के एक कालजयी शलाका-पुरुष रहे हैं। कर्नाटक में जन्मे मराठीभाषी इस संगीतकार ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश के देवास में बिताया। कुमार गन्धर्व एक चिंतक-गायक थे : उन्होंने परंपरा को निर्भीक और प्रयोगशील उत्स माना और परिवर्तन के इर्द-गिर्द संगीत का एक नया सौंदर्यशास्त्र ही गढ़ दिया। लोक को शास्त्र का मूलाधार मानते हुए उन्होंने अपने संगीत से लोकधर्मिता और शास्त्रीयता के द्वैत का अतिक्रमण किया। राग-संगीत, निर्गुण-सगुण भजन, मालवी लोकगीत आदि अनेक माध्यमों को समान अधिकार और कल्पनाशीलता से बरतते हुए कुमार गन्धर्व ने देश भर में साधारण संगीत-रसिकों, कलाकर्मियों, बुद्धिजीवियों आदि को नए और अप्रत्याशित संगीतरस से अभिभूत किया और हमारे समय में संगीत के फलितार्थों पर पुनर्विचार की उत्तेजना दी। हिन्दी में यह पुस्तक अनूठी है : वह एक संगीतप्रेमी कवि-आलोचक की एक महान् संगीतकार को अनेक किस्तों में दी गई प्रणति है। उसमें गहरे विनय, उदग्र जिज्ञासा और सजग अभिभूति से अशोक वाजपेयी ने कुमार गन्धर्व के संगीत-संसार, उनकी दृष्टि और उनकी चेष्टा को भावप्रवण काव्यभूमि और उत्तेजक बौद्धिक आधार प्रदार किया है। कुमार गन्धर्व की पचत्तरवीं वर्षगाँठ पर कविताओं, निबंधों और बातचीत का यह संकलन विशेष रूप से प्रकाशित किया जा रहा है।

About the writer

ASHOK VAJPEYI

ASHOK VAJPEYI अशोक वाजपेयी हिन्दी कवि-आलोचक, अनुवादक, सम्पादक तथा भारत की एक बड़ी सांस्कृतिक उपस्थिति हैं। कविता की 13 पुस्तकों, आलोचना की 7 पुस्तकों और अंग्रेजी में कला पर 3 पुस्तकों सहित उन्हें संस्कृति के विशिष्ट प्रसारक और नवोन्मेषी संस्था निर्माता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने भारतीय और विदेशी संस्कृतियों के मध्य परस्पर जागरूकता और आपसी संवाद को बढ़ाने के लिए अथक प्रयास किया है। कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के सम्पादक के रूप में उन्होंने कविता और आलोचना में युवा प्रतिभाओं और समकालीन तथा शास्त्रीय कलाओं की आलोचनात्मक जागरूकता का प्रसार करने के लिए अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। वे साहित्य, संगीत, नृत्य, नाटक, दृश्यकलाओं, लोक एवं जनजातीय कलाओं, सिनेमा आदि से सम्बन्धित हजारों कार्यक्रमों के आयोजक रहे हैं। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार, दयावती कवि शेखर सम्मान, भारत भारती और कबीर सम्मान प्रदान किये गये हैं। उनके काव्य संकलनों के अनुवाद अंग्रेजी, फ्रांसीसी, पोलिश, उर्दू, बांग्ला, गुजराती, मराठी और राजस्थानी में हुए हैं। भारत के एक विशिष्ट बुद्धिजीवी श्री वाजपेयी एक सृजनात्मक विश्व पर्यटक हैं, जिन्होंने सम्मेलनों में भाग लेने, व्याख्यान देने के क्रम में कई बार यूरोप आदि का भ्रमण किया है। उन्होंने पोलैण्ड के चार प्रमुख कवियों-चेस्लाव मीलोष, वीस्वावा षिम्बोस्र्का, ज़्बीग्न्येव हेर्बेर्त और तादेऊष रूज़ेविच की कृतियों का हिन्दी अनुवाद किया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा से निवृत्त होने के बाद वह दिल्ली में रह रहे हैं। उन्हें पोलैण्ड गणराज्य के राष्ट्रपति द्वारा और फ्रांसीसी सरकार द्वारा अपने उच्च सिविल सम्मानों से विभूषित किया गया है।

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