KAHANI : SAMKALEEN CHUNAUTIYAN

Format:Hard Bound

ISBN:78-81-8143-967-3

Author:SHAMBHU GUPT

Pages:200

MRP:Rs.350/-

Stock:In Stock

Rs.350/-

Details

विगत दो दशकों में हिन्दी कथा साहित्य, विशेषकर कहानी के अन्वेषी क्षितिज पर जिस तरह विविधवर्णी आलोचना उभर कर आयी है, उसने प्रत्येक गम्भीर पाठक का ध्यान आकर्षित किया है। दूसरी तरफ, बहुवचनी, बहुस्तरीय आलोचकीय कर्म ने कथा साहित्य में हो रहे परिवर्तनों को जिस सूक्ष्मता से खँगालने का प्रयास किया है, उससे शिल्प, संवेदना, भाषा आदि क्षेत्रों में परंपरागत मुहावरों और रूढ़ियों का तो अतिक्रमण हुआ ही है, उसने कहानी की बदलती प्रक्रिया और प्रविधि, उसकी संघर्षशील परम्परा की अनवरतता तथा कहानी की समकालीन चुनौतियों के बीच घुसपैठ करते हुए सीधे पाठक से अपना तादात्म्य भी स्थापित किया है। किसी भी रचना या रचनाकार को उसकी सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में ही समझा जा सकता है। शंभु गुप्त इन संदर्भों से इतर एक और संदर्भ की तह में जा पाठक और कहानी के बीच पैदा हुई सायास अनिर्दिष्टिता तथा कहानी में अंतर्निहित अवयवों को तलाशते हुए उसके मूल मर्म को पकड़, उसे ‘पाठक’ की जश्द में लाने की कोशिश करते हैंµयानी उस जश्द में लाने की कोशिश, जो लेखक की पकड़ से बाहर होता जा रहा है। यह आलोचना का वह अदृश्य पक्ष है जो इस पुस्तक की असली ताकष्त है। ‘कहानी: समकालीन चुनौतियाँ’ अपने समय, समाज और संदर्भों से जुड़ी पिछले पंद्रह वर्षों की उन महत्त्वपूर्ण कहानियों का विशद मूल्यांकन है जिन कहानियों ने हिन्दी कथा साहित्य को नया उन्मेष प्रदान किया है।

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About the writer

SHAMBHU GUPT

SHAMBHU GUPT 1954 के अन्तिम दिनांे में ब्रजप्रदेश (राजस्थान) के भरतपुर जिष्ले के हलैना नामक गाँव में जन्म। प्रारम्भिक-माध्यमिक शिक्षा गाँव के सरकारी स्कूल में। उच्च शिक्षा भरतपुर एवं आगरा में। आगरा के प्रसिद्ध कन्हैयालाल माणिकलाल मंुशी हिन्दी तथा भाषाविज्ञान विद्यापीठ से हिन्दी भाषा तथा साहित्य में एम.ए. तथा पीएच.डी.। गत तीस वर्षों से उच्च शिक्षा में प्राध्यापक। राजस्थान के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों के हिन्दी विभागों में प्राध्यापकी के बाद फिलहाल महात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा में स्त्राी अध्ययन विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष पद पर कार्यरत। प्रारम्भ में कविता, कहानी लेकिन अब आलोचना पर केन्द्रित। पिछले पच्चीस वर्षों में हिन्दी की लगभग समस्त साहित्यिक पत्रा-पत्रिकाओं में आलोचना प्रकाशित। पुरस्कार-सम्मान: ‘अभिव्यक्ति’ पत्रिका (कोटा) द्वारा युवा आलोचक का पुरस्कार (1994); डॉ. रामविलास शर्मा आलोचना सम्मान (2008); स्पन्दन आलोचना पुरस्कार (2009); अर्जुन कवि जनवाणी पुरस्कार (2011)। प्रकाशन: ‘मैंने पढ़ा समाज’, ‘कहानी: समकालीन चुनौतियाँ’ प्रकाशित। समकालीन कविता, कहानी एवं सामान्य साहित्यिक विषयों पर आलोचना की अनेक पुस्तकें प्रकाशित। सम्पर्क: प्रोफेसर, स्त्री अध्ययन विभाग, महात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, पोस्ट-हिन्दी विश्वविद्यालय, गाँधी हिल्स, वर्धा-442001 (महाराष्ट्र)

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