KABEER KI SAUNDARYA-BHAWNA

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ISBN:978-81-8143-696-2

Author:DR. BRIJBHUSHAN SHARMA

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MRP:Rs.295/-

Stock:In Stock

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कबीर जनता के और लोक-मानस के कवि थे, उन्होंने उसी में व्याप्त ब्रह्म के, अनुपम तत्व के सौन्दर्य का अनुभव किया। कबीर परम्परा, अन्धानुकरण, ग्रन्थकथित तथ्यों को स्वीकार नहीं करते थे, वे सामन्तवादी व्यवस्था के सभी मूल्यों के विरोधी थे। कबीर ने सामाजिकता, उसके अस्तित्व, अन्तर्जगत के सौन्दर्य, सभी को बहुत महत्व दिया, वे मूर्त और यथार्थ को मानते थे, इसलिए उन्होंने ऐसी रचना का अपने काव्य में विरोध किया है, जो विशुद्ध सौन्दर्य-शास्त्र के आग्रह पर कविता या कला को अमूर्त बनाती चली जाती है, उसे उसके उत्स, उसके जीवन-स्रोत और उसके सामाजिक चरित्र से उसे विच्छिन्न कर देती है। वे रचना को बाह से देखने वाली दृष्टि के विरोधी थे, इसलिए उन्होंने जो जाननाा चाहा, अनुभव करना चाहा उसके अन्तरमन में, अन्तर्जगत में झाँक कर देखा है।

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DR. BRIJBHUSHAN SHARMA

DR. BRIJBHUSHAN SHARMA ब्रज भूषण शर्मा, जन्म: 7 नवम्बर, 1934, लाहौर। शिक्षा: एम.ए., पीएच.डी. दिल्ली विश्वविद्यालय। कृति सन्दर्भ: मानववाद तथा मानवतावाद अपना आपु पिछानि रे। शोध उपाधि: ”मध्यकालीन हिन्दी सन्त साहित्य में मानवतावादी विचारधारा“ दिल्ली विश्वविद्यालय। हिन्दी और अंग्रेजी पत्र-पत्रिकाओं में सन्त साहित्य, सूफी साहित्य, मानवतावाद, लोक साहित्य पर लेख प्रकाशित। धर्म, दर्शन, लोक साहित्य, मानवतावाद के अध्ययन में अभिरुचि। सम्प्रति: दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से वरिष्ठ प्राध्यापक के रूप में सेवानिवृत्त। सम्पर्क सूत्र: 1660, सोहन गंज, सब्जी मण्डी, दिल्ली-7।

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