KALAON KI MOOLYA-DRISHTI

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ISBN:978-81-8143-953-6

Author:HEMANT SHESH

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MRP:Rs.395/-

Stock:In Stock

Rs.395/-

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क्या कलाओं की कोई एक विश्व-दृष्टि है? अनेकात्मकता के उत्स और कारण क्या हैं? कलाओं की मूल्य-दृष्टि के सन्दर्भ में हमारे बौद्धिक और सर्जनात्मक दायित्व क्या है? किन-किन आग्रहों ने वर्तमान सदी के कला-मूल्यों को पिछले कालख्ण्डों की तुलना में बदला है? मूल्य-संक्रमण के इस दौर में क्या कुछ ऐसे कला-मूल्य और आदर्श हैं, जिन्हें यथासम्भव बनाये-बचाये रखनेे के लिए सुव्यविस्थत प्रयास ज़रूरी हैं? हमारी अन्य संस्कृतियों से सम्पर्क की प्रकृति और दिशा क्या है? इस अन्तःक्रिया के मूल्य-दृष्टि पर क्या स्वभाविक परिणाम हैं? आधुनिक मूल्य-दृष्टि प्राचीन परम्परा के प्रसंग में कितनी सुसंगत अर्थकामी और मानवोन्मुखी है? कलाओ और व्यक्ति के बीच सम्बन्ध कैसे हों? परम्पराा के नवोन्मेष के लिए क्या भारतीय कला-दृष्टि में कोई अन्तर्निहित उत्प्रेरणाएँ और बौद्धिक संकेत हैं? वे किन-किन रूपों में हमें दिखते रहे हैं? क्या कलाओं की मूल्य-दृष्टि एक ऑर्गैनिक प्रक्रिया जैसी है। कला-मूल्य मानव-केन्द्रित हैं या सृष्टि-केन्द्रित? क्या हमें कलाओं में नये शास्त्रों की जरूरत नहीं है। ऐसे ही कुछ प्रश्नों को ले कर मन में उठी जिज्ञासाओं को जब इस पुस्तक के सम्पादक ने अपने समय के महत्वपूर्ण चिन्तकों के सामने रखा तो उन्होंने अपने-अपने ढंग से मन्थन किया और अपने विचार सामने रखें। मुझे उम्मीद है हिन्दी में स्तरीय सौन्दर्य-शास्त्र-चिन्तन की कमी को पूरा करने की दिशा में इस पुस्तक से केवल विद्यार्थियों का ही नहीं, पाठकों का भी लाभ होगा जो कलाओं की संश्लिष्ट और जटिल, किन्तु बहुत पुरानी होने के बावजूद रोज़-रोज़ नयी बनती रंगारंग दुनिया को अधिक अन्तरंग और गम्भीरता से समझना-बूझना चाहते हों।

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About the writer

HEMANT SHESH

HEMANT SHESH जन्म : 28 दिसंबर 1952, जयपुर (राजस्थान) भाषा : हिंदी विधाएँ : कविता, कला-आलोचना, कहानी मुख्य कृतियाँ कविता संग्रह : जारी इतिहास के विरुद्ध, बेस्वाद हवाएँ, घर-बाहर, वृक्षों के स्वप्न, अशुद्ध सारंग, रंग अगर रंग है, कृपया अन्यथा न लें, आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी, जगह जैसी जगह, नींद में मोहनजोदड़ो, कष्ट के लिए क्षमा, बहुत कुछ जैसा कुछ नहीं, प्रपंच-सार-सुबोधिनी, खेद योग-प्रदीप कहानी संग्रह : रात का पहाड़ संपादन : कृपाल सिंह शेखावत (कलाकार मोनोग्राफ), सौंदर्यशास्त्र के प्रश्न, कला-विमर्श, भारतीय कला रूप, भारतीय रंगमंच, कलाओं की मूल्य दृष्टि, भारतीयता की धारणा, जलती हुई नदी (कविता संकलन), चेतना (सेंट्रल स्कूल, जयपुर की वार्षिक पत्रिका - 1968), समवेत (सांस्कृतिक नृतत्वशास्त्र और दक्षिण भारतीय संस्कृति पर केंद्रित - 1970), प्रयास (विविध कलाओं का प्रकाशन, प्रयास कला संस्थान, जयपुर - 1971), कला-प्रयोजन (द्विभाषी, पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृति केंद्र, उदयपुर की कला एवं साहित्य त्रेमासिक सन 1995 से आज तक निरंतर), कला-यात्रा (पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर - 1998), वयम् (त्रिभाषी अनुसंधान त्रैमासिक पत्रिका - राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय - 2006-2007) सम्मान बिहारी पुरस्कार संपर्क 40/158, मानसरोवर, जयपुर - 302020 (राजस्थान)

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