AAWAZ CHALI AATI HAI

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-176-9

Author:SHAZ TAMAKANAT

Pages:184

MRP:Rs.275/-

Stock:In Stock

Rs.275/-

Details

‘आवाज़ चली आती है’ दखन के सुप्रसिद्ध शायर शाज़ तमकनत का काव्य संग्रह है। इस संग्रह में उनकी प्रतिनिधि ग़ज़लों और नज़्मों का चुनाव किया गया है। आधुनिक उर्दू कविता में शाज़ तमकनत अपने समय के सुप्रसिद्ध कवियों में स्वयं को दर्ज करवाते हैं। दखन के नामी-गिरामी शायरों में शाज़ का शुमार होता है। पारम्परिक और आधुनिक कविता के बीच जिस सेतु का निर्माण शाज़ तमकनत ने किया वह स्वयं में एक युग की स्वीकृति लिये हुए है। इनकी ग़ज़लों और नज़्मों में जहाँ निजी ज़िन्दगी के दुख-दर्द दिखाई देते हैं वहीं उनका दुख सार्वजनीन आत्मचेतना के रूप में अनुभव किया जा सकता है। यहीं ग़मे जानां और ग़मे दौरा दोनों का संगम शाज़ के रचना संसार की पहचान बनकर उभरता है और 21वीं सदी में उर्दू साहित्य के जरिये शायरी के क्षेत्र में एक आवाज़ चली आती है।

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About the writer

SHAZ TAMAKANAT

SHAZ TAMAKANAT "शाज़ अमकनत का जन्म 31 जनवरी 1933 को हेदराबाद में हुआ। साज अमकनत प्रेम,विरह और संवेदना के शायर रहे हैं। जहां उन्होने अपनी गज़लों में प्रेम से तापी हुई गज़लें कही हैं। वहीं विरह की आग में भस्म होते हुए अपने ह्रदय की बनी को भी इनहोने स्वर दिया है। इनके सुप्रसिद्ध शायर मखदूम मोहियोद्दीन पर अपना सोध ग्रंथ प्रस्तुत किया,जो ‘मखदूम मोहियोद्दीन हयात और कारनामे’ नाम से प्रकाशित हो चुका है। शाज़ तमकनत को अनेक प्रदेशों की उर्दू अकादमियों से सम्मान प्राप्त हो चुका है। वें उसमानीय विश्व विध्यालय,उर्दू विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रहे। "

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