KAHANI KA RANGMANCH

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ISBN:978-93-5072-034-9

Author:MAHESH AANAND

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MRP:Rs.300/-

Stock:Out of Stock

Rs.300/-

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प्रायः ढाई दशक पूर्व देवेन्द्र राज अंकुर ने अभिनेता को केन्द्र में लाने और उसकी ऊर्जा को विस्तार देने के लिए; अभिनय, रंगभाषण और स्पेस के नये और प्रभावशाली स्वरूप को रेखांकित करते हुए कहानी का रंगमंच की शुरुआत की थी। तब से आजतक 180 कहानियों और 13 उपन्यासों के मंचन में उनकी निजता को अक्षुण्ण रखते हुए, उन्होंने इस प्रयोग को ठोस आधार दिया है। प्रस्तुत पुस्तक इस नयी दृश्यभाषा एवं समग्र दृश्यात्मक अनुभव के विकास और इतिहास का एक बहुआयामी लेखा-जोखा है। रंगमंच से गहरा जुड़ाव रखने वाले समीक्षक महेश आनन्द द्वारा सम्पादित यह पुस्तक कहानी के रंगमंच से सम्बन्धित पहला आलोचनात्मक संग्रह है। इस नये रंगप्रयोग से जुड़े रचनाकारों, अभिनेताओं और समीक्षकों के अभिमतों, टिप्पणियों एवं विश्लेषणों के साथ-साथ, रंगकर्म को नयी रचनात्मक ज़मीन देने वाली निर्देशक के साथ दो लम्बे साक्षात्कार भी इसमें शामिल हैं। साथ ही ‘अन्तःसाक्ष्य’ के अन्तर्गत तीन महत्त्वपूर्ण प्रस्तुति-आलेख भी संकलित हैं। अन्त में, अंकुर द्वारा मंचित कहानियों और उपन्यासों की सूची भी दी गयी है। निश्चय ही, ये सभी इस प्रयोग से सीधा साक्षात्कार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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