JAHAN-E-RUMI

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-751-8

Author:RAAJKUMAR KESWANI

Pages:160

MRP:Rs.495/-

Stock:In Stock

Rs.495/-

Details

कोई 800 साल पहले इस जहान में एक ऐसा जीव आया, जिसने मामूली सी इंसानी ज़िन्दगी को एक बहुत बड़ा अर्थ दे दिया। जीवन का ऐसा मार्ग दिखाया कि जिस पर जितना चलो, उतना ही जीने का मतलब समझ में आने लगे। इस महापुरुष का नाम है, सूफी सन्त कवि रूमी। मौलाना जलालुद्दीन मुहम्मद रूमी। इस सूफी सन्त ने पिछले 800 बरस में दुनिया के अनेक महापुरुषों के वि़चारों, उनके लेखन को प्रभावित किया है। इनमें हमारे भक्तिकाल के कवि खासकर कबीर, जिनका जन्म रूमी के लगभग 250 साल बाद हुआ, पर इनका काफी प्रभाव दिखाई देता है। प्रसिद्ध शायर अली सरदार जाफरी ने ‘कबीर बानी’ की भूमिका में भी कहा है, ‘...इस जगह पर हिन्दू-भक्ति और मुस्लिम तसव्वुफ का संगम अनिवार्य था। इसलिए बाज़ जगहों पर मंसूर की अनलहक की गूँज के अलावा जिसका जिक्र पहले आ चुका है कबीर की शिक्षाओं पर रूमी के विचारों का असर भी दिखाई देता है, जिसे उन्होंने हिन्दू-भक्ति के ढंग से पेश किया है। वही प्रताप, वही बेचैनी, जो रूमी की ग़ज़लों की विशेषता है कबीर की मानवता का तत्त्व है...’ महाकवि अल्लामा इक़बाल तो रूमी को अपना उस्ताद और रहबर मानते रहे। वे मानते थे कि उनके सारे सवालों के जवाब रूमी की कविता में मौजूद हैं। इसकी मिसाल उन्होंने अपनी एक नज़्म ‘पीर-ओ-मुरीद’ में खुद ही पेश की है।

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RAAJKUMAR KESWANI

RAAJKUMAR KESWANI 26 नवम्बर 1950 को भोपाल में जन्मे राजकुमार केसवानी की पहली पहचान एक पत्रकार के रूप में है। 1968 में कॉलेज पहँचते ही यह सफर 'स्पोर्ट्स टाइम्स' के सह-सम्पादक के रूप में शुरू हो गया। पिछले 40 साल के दौरान इधर-उधर भागने की तमाम कोशिशों के बावजूद जहाज़ का पंछी पुनि-पुनि उड़कर इसी जगह लौटता रहा है। इन सालों में छोटे-छोटे स्थानीय अखबारों से लेकर, राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय अखबारों, जैसे न्यूयार्क टाइम्स, द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया, संडे, द संडे आब्जर्वर, इंडिया टुडे, आउटलुक, इकॉनामिक एंड पोलिटिकल वीकली, इंडियन एक्सप्रेस, जनसत्ता, नवभारत टाइम्स, दिनमान, न्यूज़टाइम, ट्रिब्यून, द वीक, द एशियन एज, द इंडिपेंडेंट जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों से विभिन्न रूपों से सम्बद्ध रहे। 1998 से 2003 तक एनडीटीवी के मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ ब्यूरो प्रमुख। फरवरी 2003 से दैनिक भास्कर, इन्दौर संस्करण के सम्पादक। नवम्बर 2004 से भास्कर समूह में ही सम्पादक (मैगज़ीन्स) के पद पर अगस्त 2009 तक कार्यरत। 1984 में विश्व की भीषणतम भोपाल गैस त्रासदी की ढाई वर्ष पहले से लगातार चेतावनी देते रहने के पुरस्कार स्वरूप राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना। इनाम-इकराम मिला, जिनमें श्रेष्ठ पत्रकारिता के लिए भारत का सर्वोच्च पुरस्कार 'बी.डी. गोयनका अवार्ड' (1985) और पर्यावरण पर रिपोर्टिंग के लिए 2010 में प्रतिष्ठित 'प्रेम भाटिया जर्नलिज़्म अवार्ड' भी सम्मिलित है। 2004 में कनेडियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन और व्हाइट पाइन पिक्चर्स द्वारा पत्रकारिता में अवदान को रेखांकित करता वृत्तचित्र 'भोपाल-द सर्च फार जस्टिस' । पेंग्विन द्वारा प्रकाशित 'ब्रेकिंग द बिग स्टोरी' के प्रथम अध्याय के लेखक। 2008 में एशिया के 15 चुनिंदा पत्रकारों में चयन, जिनके लेख छह एशियाई भाषाओं में पुस्तक रूप में कोरिया से प्रकाशित। 'पहल', 'नया ज्ञानोदय', 'कथादेश', 'कादम्बिनी' सहित देश भर की विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं में कविता, कहानी प्रकाशन । वर्ष 2006 में पहला कविता संग्रह 'बाकी बचें जो', 2007 में दूसरा संग्रह 'सातवाँ दरवाजा' 2008 में 13वीं शताब्दी के महान सूफी सन्त-कवि मौलाना जलालुद्दीन रूमी की फारसी कविताओं का हिन्दुस्तानी अनुवाद 'जहान-ए-रूमी' प्रकाशित। पिछले पाँच वर्ष से 'दैनिक भास्कर' में संगीत और सिनेमा को समर्पित लोकप्रिय कॉलम 'आपस की बात' लगातार जारी है।

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