KAHANI : ANUBHAV AUR ABHIVYAKTI

Format:Hard Bound

ISBN:81-7055-473-X

Author:ED. RAJENDRA YADAV

Pages:

MRP:Rs.250/-

Stock:In Stock

Rs.250/-

Details

कहानी पर आलोचना की यह पुस्तक चार भागों में विभक्त है। पहले भाग में साहित्य और कहानी की समझ को लिया गया है। इसमें साहित्य की लेखकीय पहचान और प्रासंगिकता जैसे प्रश्नो को अपने ढंग से समझने और संवारने का प्रयास किया गया है। दूसरे भाग में हिन्दी कहानी की यात्रा के भिन्न पड़ाव हैं, मोड़ हैं और भविष्य के संकेत हैं। राजेन्द्रजी प्रेमचन्द की विरासत से अपनी बात शुरू करते हैं और नयी कहानी जैसे कथा आन्दोलनों से गुजरते हुए वर्तमान तक पहुँचते हैं। तीसरे भाग में कुछ कहानीकार के लेखन की सार्थकता की पहचान है। अपनी पहचान भी इसमें शामिल है। मूल्याँकन कम अन्वेषण ज्यादा है। खाली-पीली फैसला सुनाने की बजाय राजेन्द्रजी बात की तह में जाना अधिक पसन्द करते हैं और इसमें काफी निर्मम हो जाते हैं। चौथे भाग में कुछ टिप्पणियाँ हैं। जिनमें प्रेम कहानी, व्यक्तिवादी कहानी जैसे कठघरों से बाहर आकर एक ‘फ्री स्टाइल कोशिश की गयी है-छोटी-छोटी घटनाओं, मुद्दों चुनाव की समस्याओं के आधार पर कहानी की नब्ज पकड़ने की।

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