MAA

Format:Paper Back

ISBN:978-81-8143-713-6

Author:MUNAWWAR RANA

Pages:94

MRP:Rs.150/-

Stock:In Stock

Rs.150/-

Details

ज़रा-सी बात है लेकिन हवा को कौन समझाये, दिये से मेरी माँ मेरे लिए काजल बनाती है।

Additional Information

लगती नहीं है मुझको मुसीबत की तेज़ धूप, छतरी है इक दुआओं की सर पर लगी हुई।

About the writer

MUNAWWAR RANA

MUNAWWAR RANA मुनव्वर राना का जन्म 26 नवम्बर, 1952 को रायबरेली, उत्तर प्रदेश में हुआ था। सैयद मुनव्वर अली राना यूँ तो बी. कॉम. तक ही पढ़ पाये किन्तु ज़िन्दगी के हालात ने उन्हें ज्यादा पढ़ाया भी उन्होंने खूब पढ़ा भी। माँ, ग़ज़ल गाँव, पीपल छाँव, मोर पाँव, सब उसके लिए, बदन सराय, घर अकेला हो गया, मुहाजिरनामा, सुखन सराय, शहदाबा, सफ़ेद जंगली कबूतर, फुन्नक ताल, बग़ैर नक़्शे का मकान, ढलान से उतरते हुए और मुनव्वर राना की सौ ग़ज़लें हिन्दी व उर्दू में प्रकाशित हुईं। कई किताबों का बांग्ला व अन्य भाषाओं में अनुवाद भी हुआ।

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