VIGYAN NAYEE CHUNOTIYA

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-112-X

Author:D.B. BHATACHARYA

Pages:478

MRP:Rs.700/-

Stock:In Stock

Rs.700/-

Details

बीसवीं सदी में आधुनिक विज्ञान का जहाँ चतुर्मुखी विकास हुआ, वहीं भौतिक समृद्धि के पीछे अन्धे होकर भागने की राष्ट्रों और नागरिकों की विवेकहीन प्रतिस्पर्धा ने विज्ञान के मूलभूत नियमों की अवहेलना भी की। आकाश, पृथ्वी, हवा, पानी, वानिकी की संवेदना और स्वभाव के साथ निर्ममतापूर्वक बर्ताव करते हुए हमने उन्हें तुच्छ माना और उनके प्राकृतिक सन्तुलन को बिगाड़ा। इसी नकारात्मक प्रवृत्ति के चलते मानव-जीवन का पोषण करने वाले पर्यावरण की गम्भीर समस्याएँ खड़ी हुईं। उन समस्याओं का अध्ययन करने और उनके समाधान देखने के लिए पर्यावरण विज्ञान का विकास हुआ। यहाँ ‘पर्यावरण का सन्तुलन’ और ‘तालाब’ उपशीर्षकों के अन्तर्गत इसी पर्यावरण विज्ञान से पाठकों का तादात्म्य होगा। तीसरे उपशीर्षक के अन्तर्गत विज्ञान की सन्तुलित नीति और चौथे उपशीर्षक के अन्तर्गत विज्ञान की सन्तुलित नीति और चौथे उपशीर्षक के अन्तर्गत विज्ञान के अध्ययन में प्रयुक्त होने वाले पारिभाषिक शब्दों को फोकस में रखा गया है। इस प्रकार ‘लोकोपयोगी विज्ञान विश्वकोश’ का यह खंड विज्ञान के अनुपूरक विषयों को इस प्रकार सामने लाता है कि चीजों को देखने के हमारे नजरिये में तार्किक वैज्ञानिकता का इजाफा है।

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