SURAJ GAGRAI

Original Book/Language: बांग्ला भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित अनुवादक – सुशील गुप्ता

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-972-7

Author:MAHASHWETA DEVI

Translation:सूरज गगराइ जब निरा छोटा था, तभी से वह सुनता आ रहा है कि इस चेरो नदी के सीने पर बाँध बनेगा। उसमें इतना पानी होगा कि दरिया की तरह असीम होगा। इस पार खड़े हो, तो उस पार का छोर नज़र नहीं आएगा। ये तमाम बातें बूढ़े-बुजुर्ग कहा करते थे। यह बताना बेहतर है कि सूरज ने कभी भी इन बातों पर भरोसा नहीं किया। भरोसा क्यों करे, यह तुम लोग ही बताओ। सूरज कोलहान-सन्तान था। कोलहानों के पास जंगल है, खदान है, कितना कुछ है। चेरो बाँध प्रकल्प दुबारा चालू हो रहा है, लेकिन यह कहानी लिखने तक, सदर प्रशासन बेहद चिन्तित है, क्योंकि जिस किसी भी पेड़ के तने पर जिस किसी चट्टान पर सूरज गगराइ का नाम लगातार लिखा जा रहा है, मिटाया जा रहा है...फिर लिखा जा रहा है, फिर मिटाया जा रहा है। कोलहान में ही ऐसी अनहोनी घटना हो सकती है! सच तो यह है कि सूरज गगराइ, मौत के बाद, प्रशासन को और ज्यादा सता रहा है। बिरसा सेतु पर बेहद उद्धत तरीके से लिखा हुआ है- 'सूरज गगराइ के अवशेष में काँच और धातु के चूरे क्यों मिले हैं, डी. एस. पी. जवाब दो।'

Pages:136


MRP : Rs. 250/-

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बांग्ला भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित अनुवादक – सुशील गुप्ता

Additional Information

सूरज गगराइ जब निरा छोटा था, तभी से वह सुनता आ रहा है कि इस चेरो नदी के सीने पर बाँध बनेगा। उसमें इतना पानी होगा कि दरिया की तरह असीम होगा। इस पार खड़े हो, तो उस पार का छोर नज़र नहीं आएगा। ये तमाम बातें बूढ़े-बुजुर्ग कहा करते थे। यह बताना बेहतर है कि सूरज ने कभी भी इन बातों पर भरोसा नहीं किया। भरोसा क्यों करे, यह तुम लोग ही बताओ। सूरज कोलहान-सन्तान था। कोलहानों के पास जंगल है, खदान है, कितना कुछ है। चेरो बाँध प्रकल्प दुबारा चालू हो रहा है, लेकिन यह कहानी लिखने तक, सदर प्रशासन बेहद चिन्तित है, क्योंकि जिस किसी भी पेड़ के तने पर जिस किसी चट्टान पर सूरज गगराइ का नाम लगातार लिखा जा रहा है, मिटाया जा रहा है...फिर लिखा जा रहा है, फिर मिटाया जा रहा है। कोलहान में ही ऐसी अनहोनी घटना हो सकती है! सच तो यह है कि सूरज गगराइ, मौत के बाद, प्रशासन को और ज्यादा सता रहा है। बिरसा सेतु पर बेहद उद्धत तरीके से लिखा हुआ है- 'सूरज गगराइ के अवशेष में काँच और धातु के चूरे क्यों मिले हैं, डी. एस. पी. जवाब दो।'

About the writer

MAHASHWETA DEVI

MAHASHWETA DEVI बांग्ला की प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी का जन्म 1926 में ढाका में हुआ। वह वर्षों बिहार और बंगाल के घने कबाइली इलाकों में रही हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में इन क्षेत्रों के अनुभव को अत्यन्त प्रामाणिकता के साथ उभारा है। महाश्वेता देवी एक थीम से दूसरी थीम के बीच भटकती नहीं हैं। उनका विशिष्ट क्षेत्र है-दलितों और साधन-हीनों के हृदयहीन शोषण का चित्रण और इसी संदेश को वे बार-बार सही जगह पहुँचाना चाहती हैं ताकि अनन्त काल से ग़रीबी-रेखा से नीचे साँस लेनेवाली विराट मानवता के बारे में लोगों को सचेत कर सकें। गैर-व्यावसायिक पत्रों में छपने के बावजूद उनके पाठकों की संख्या बहुत बड़ी है। उन्हें साहित्य अकादेमी, ज्ञानपीठ पुरस्कार व मैग्सेसे पुरस्कार समेत अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

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