HINDU

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5229-578-4

Author:DR. SHARANKUMAR LIMBALE

Pages:150

MRP:Rs.125/-

Stock:In Stock

Rs.125/-

Details

हिंदू

Additional Information

वरिष्ठ रचनाकार प्रो. नरेंद्र कोहली ने कहा कि इस पुस्तक की विषयसूची देखकर ही मैं अंदर की सामग्री समझ गया था क्योंकि अपने दीर्धकालीन लेखन में यही झेलता आया हूँ। इस किताब में दर्ज कई लेखकों के नाम भी मैं नहीं जानता क्योंकि मैं उनके समाज का अंग ही नहीं हूँ। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने कहा था कि साहित्य राजनीति की मशाल है पर आज तक किसी प्रधानमंत्री ने प्रेमचंद का अनुसरण नहीं किया। अक्सर साहत्यिकार ही नेताओं से लाभ लेने के चक्कर में उनकी हाज़िरी बजाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि लेखक वह है जो अपनी अभिव्यक्ति को नहीं रोके। जैसे कोई स्त्री अपने प्रसव को नहीं रोक सकती, सच्चा लेखक अपनी अभिव्यक्ति को नहीं रोक सकता। संसार में किसी भी तरह की कट्टरता की जगह नहीं है। अनंत विजय ने यह पुस्तक लिखने की हिम्मत दिखाई, उसे साधुवाद लेकिन यह मार्क्सवाद का अर्द्धसत्य नहीं, पूर्ण सत्य है।

About the writer

DR. SHARANKUMAR LIMBALE

DR. SHARANKUMAR LIMBALE 1 जून, 1956 को जन्मे डॉ. शरणकुमार लिंबाले ने एम.ए. , पीएच.डी. की शिक्षा प्राप्त की है। ‘अक्करमाशी’ (आत्मकथा) , ‘‘छुआछूत’, ‘‘देवता आदमी’, ‘‘दलित ब्राह्मण’ (कहानी संग्रह) , ‘दलित साहित्य का सौन्दर्यशास्त्र’ (समीक्षा) , ‘नरवानर’, ‘हिंदू’, ‘बहुजन’ (उपन्यास) आपकी हिन्दी में प्रकाशित कृतियाँ हैं। आप नासिक (महाराष्ट्र) के यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी में विद्यार्थी कल्याण विभाग के प्रोफेसर और डायरेक्टर हैं।

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