MEELU KE LIYE

Original Book/Language: मीलू के लिए

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-679-5

Author:MAHASHWETA DEVI

Translation:आज के साहित्य के ठोस आधार को आज की ठोस परिस्थितियों के विश्लेषण से ही खोजा जा सकता है और तभी इसकी बुनियाद पक्की होगी। शोषण और उत्पीड़न की प्रक्रिया को नंगा करना होगा। भारत की जटिल व उलझी हुई भूमि-व्यवस्था, भूमि सुधार, कानून के भेस में खेतिहर मजदूरों का शोषण, जातीय उत्पीड़न, वर्ग तथा जातीय उत्पीड़न, प्रशासन का असली चेहरा और आंदोलन के अवसरवादी सुधारवादी वामपंथियों द्वारा नेतृत्व, ये सब समस्याएँ ही आज के साहित्य की भूमिका और उसके विकास की दिशा को तय करेंगी। सत्य को बार-बार दुहराना होगा। यह बहुत नाजुक वक़्त है। आज के पेशेवर लेखकों को इतिहास कभी माफ़ नहीं करेगा। हम सभी लेखकों के एकजुट होकर जनता की समस्याओं के वास्तविक गतिविधियों के साथ व्यक्त करना होगा। लेखक की समस्याओं और संघर्षों से अलग-अलग रहना सबसे बड़ा अपराध है। लेखक मौन रहा जब सिपाहियों , सी. आर. पी. और सरकार के पाले हुए गुंडों ने कानून और व्यवस्था के नाम पर पश्चिमी बंगाल के एक विशाल कत्लगाह में बदल दिया। आज भी बंगाल में ये स्थितियाँ दूसरे बदले हुए, सुधार के साथ मौजूद हैं। डेबरा-गोपी बल्लभगढ़ में आज भी सरकारी आतंक कायम हैं। लेखकों को इन समस्त स्थितियों से जूझना होगा।

Pages:96

MRP:Rs.125/-

Stock:In Stock

Rs.125/-

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मीलू के लिए

Additional Information

आज के साहित्य के ठोस आधार को आज की ठोस परिस्थितियों के विश्लेषण से ही खोजा जा सकता है और तभी इसकी बुनियाद पक्की होगी। शोषण और उत्पीड़न की प्रक्रिया को नंगा करना होगा। भारत की जटिल व उलझी हुई भूमि-व्यवस्था, भूमि सुधार, कानून के भेस में खेतिहर मजदूरों का शोषण, जातीय उत्पीड़न, वर्ग तथा जातीय उत्पीड़न, प्रशासन का असली चेहरा और आंदोलन के अवसरवादी सुधारवादी वामपंथियों द्वारा नेतृत्व, ये सब समस्याएँ ही आज के साहित्य की भूमिका और उसके विकास की दिशा को तय करेंगी। सत्य को बार-बार दुहराना होगा। यह बहुत नाजुक वक़्त है। आज के पेशेवर लेखकों को इतिहास कभी माफ़ नहीं करेगा। हम सभी लेखकों के एकजुट होकर जनता की समस्याओं के वास्तविक गतिविधियों के साथ व्यक्त करना होगा। लेखक की समस्याओं और संघर्षों से अलग-अलग रहना सबसे बड़ा अपराध है। लेखक मौन रहा जब सिपाहियों , सी. आर. पी. और सरकार के पाले हुए गुंडों ने कानून और व्यवस्था के नाम पर पश्चिमी बंगाल के एक विशाल कत्लगाह में बदल दिया। आज भी बंगाल में ये स्थितियाँ दूसरे बदले हुए, सुधार के साथ मौजूद हैं। डेबरा-गोपी बल्लभगढ़ में आज भी सरकारी आतंक कायम हैं। लेखकों को इन समस्त स्थितियों से जूझना होगा।

About the writer

MAHASHWETA DEVI

MAHASHWETA DEVI बांग्ला की प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी का जन्म 1926 में ढाका में हुआ। वह वर्षों बिहार और बंगाल के घने कबाइली इलाकों में रही हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में इन क्षेत्रों के अनुभव को अत्यन्त प्रामाणिकता के साथ उभारा है।महाश्वेता देवी एक थीम से दूसरी थीम के बीच भटकती नहीं हैं। उनका विशिष्ट क्षेत्र है-दलितों और साधन-हीनों के हृदयहीन शोषण का चित्रण और इसी संदेश को वे बार-बार सही जगह पहुँचाना चाहती हैं ताकि अनन्त काल से गरीबी-रेखा से नीचे साँस लेनेवाली विराट मानवता के बारे में लोगों को सचेत कर सकें। गैर-व्यावसायिक पत्रों में छपने के बावजूद उनके पाठकों की संख्या बहुत बड़ी है। उन्हें साहित्य अकादेमी, ज्ञानपीठ पुरस्कार व मैग्सेसे पुरस्कार समेत अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

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