LALGARH KI MAA

Original Book/Language: " लेखिका की यह कहानी एक माँ की करूण गाथा को पाठक के सामने रखती है। जिसमे एक माँ पढे लिखे बेटे के साथ कैसे अपना जीवन जीती है क्या क्या उसके जीवन में बिडंबना आती है जिनसे उससे लड़ना पड़त है। "

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-487-6

Author:MAHASHWETA DEVI

Translation:अनुवादक – सुशील गुप्ता

Pages:52

MRP:Rs.125/-

Stock:Out of Stock

Rs.125/-

Details

" लेखिका की यह कहानी एक माँ की करूण गाथा को पाठक के सामने रखती है। जिसमे एक माँ पढे लिखे बेटे के साथ कैसे अपना जीवन जीती है क्या क्या उसके जीवन में बिडंबना आती है जिनसे उससे लड़ना पड़त है। "

Additional Information

अनुवादक – सुशील गुप्ता

About the writer

MAHASHWETA DEVI

MAHASHWETA DEVI बांग्ला की प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी का जन्म 1926 में ढाका में हुआ। वह वर्षों बिहार और बंगाल के घने कबाइली इलाकों में रही हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में इन क्षेत्रों के अनुभव को अत्यन्त प्रामाणिकता के साथ उभारा है।महाश्वेता देवी एक थीम से दूसरी थीम के बीच भटकती नहीं हैं। उनका विशिष्ट क्षेत्र है-दलितों और साधन-हीनों के हृदयहीन शोषण का चित्रण और इसी संदेश को वे बार-बार सही जगह पहुँचाना चाहती हैं ताकि अनन्त काल से गरीबी-रेखा से नीचे साँस लेनेवाली विराट मानवता के बारे में लोगों को सचेत कर सकें। गैर-व्यावसायिक पत्रों में छपने के बावजूद उनके पाठकों की संख्या बहुत बड़ी है। उन्हें साहित्य अकादेमी, ज्ञानपीठ पुरस्कार व मैग्सेसे पुरस्कार समेत अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

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