PRANAAM

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-176-9

Author:ARUN ASTHANA

Pages:154

MRP:Rs.150/-

Stock:In Stock

Rs.150/-

Details

अपने पहले उपन्यास ‘प्रणाम’ के साथ अरुण अस्थाना समकालीन कथा जगत में अपनी विशिष्ठ सर्जनात्मक सम्भावनाओं के साथ प्रवेश कर रहे हैं। अजीत और भाईजी जैसे दो प्रमुख पात्रों और दूसरे बहुरंगी चरित्रों के माध्यम से उन्होनें न केवल आज की भ्रष्ट और हिंसक स्थितियों का भयावह विमर्श विकसित किया अहै, बल्कि उसी के साथ दिशाहीनता, समस्याओं से रू-ब-रू होने की अनिच्छा और सिर्फ़ वर्तमान मेन जीने की सीमाबद्धता से आक्रांत नई पीढ़ी के संकट को भी बखूबी उभारा है। समकालीन साहित्य में अजीत जैसे पात्र की परिकल्पना दुर्लभ कोटि की रचनाशीलता की अपेक्षा रखती है। नयी पीढ़ी के भटकाव को उसकी सामाजिक दायित्वहीनता मानने की सरलीकृत धारणा को ख़ारिज करते हुए लेखक ने अजीत के मानसिक संघर्ष और ऊहापोह में एक ऐसी त्रासदी की सृष्टि की है जिसमें व्यक्ति के विवेक और कर्म के बीच की खाई निरन्तर चौड़ी होती जाती है। कथा की अप्रत्याशित चरम सीमा तक आते आते कथानायक जब अपने उच्चतर संकल्पों को मूर्त रूप देना चाहता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है और अपराध और हिंसा का घना अंधकार, सहज संस्कार की तरह उसे अपने में समेट लेता है।

Additional Information

No Additional Information Available

About the writer

ARUN ASTHANA

ARUN ASTHANA

Books by ARUN ASTHANA

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality