AJNEYA AUR POORVOTTAR BHARAT

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-732-7

Author:RITARANI PALIWAL

Pages:

MRP:Rs.200/-

Stock:In Stock

Rs.200/-

Details

'अज्ञेय और पूर्वोत्तर भारत'

Additional Information

इस पुस्तक की सामग्री अज्ञेय की पूर्वोत्तर भारत की यात्राओं और प्रवास से सम्बन्धित है। अज्ञेय द्वारा की गई यह पहल कितनी महत्त्वपूर्ण है यह बात आज हम आसानी से समझ सकते हैं। आज सभी महसूस कर रहे हैं कि पूर्वोत्तर राज्यों की ओर ख़ास तौर पर ध्यान देना चाहिए। अब तक ऐसा न किए जाने का परिणाम यह हुआ है कि पूर्वोत्तर भारत के लोगों ने अपने को उपेक्षित और अलग-थलग महसूस किया है और पूर्वोत्तर की समस्याएँ सुलझने की बजाय उलझती गयी हैं। छह दशक पहले अज्ञेय द्वारा प्रस्तुत पूर्वोत्तर सीमा प्रान्त की ये झाँकियाँ उन इलाकों की जातीय सम्वेदना से हमारा साक्षात्कार कराती हैं। 'अज्ञेय और पूर्वोत्तर भारत' अज्ञेय जन्मशती के अवसर पर वाणी प्रकशन की ख़ास प्रस्तुति है जिसमें इस विषय से जुड़ी अज्ञेय की कहानियों और निबन्धों को सम्पादित किया गया है।

About the writer

RITARANI PALIWAL

RITARANI PALIWAL जन्म: 3 सितम्बर 1949, खैरगढ़, ज़िला - मैनपुरी (उत्तर प्रदेश)। शिक्षा: हिन्दी और अंग्रेजी में एम.ए. करने के बाद नाटक और रंगमंच पर हिन्दी में पीएच.डी. और डी.लिट्. किया। जापान में रहते हुए जापानी नाटक और रंगमंच को देखने-जानने-समझने का अवसर मिला। साहित्य, संस्कृति और समसामयिक विषयों पर पत्रिकाओं में लेखन। प्रमुख प्रकाशन: यूनानी और रोमी काव्यशास्त्र, रंगमंच और जयशंकर प्रसाद के नाटक, जयशंकर प्रसाद और मोहन राकेश की रंग-दृष्टि का तुलनात्मक अध्ययन, जापानी रंग-परम्परा: नोह, काबुकी और बुनाराकु, जापान के विविध रंग-राग, अज्ञेय के सृजन में जापान, अनुवाद की सामाजिक भूमिका, अनुवाद प्रक्रिया और परिदृश्य। प्रेमचन्द के उपन्यास कर्मभूमि का अंग्रेजी में अनुवाद, जापानी मन्योशु कविताओं का हिन्दी में अनुवाद। इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग में प्रोफ़ेसर तथा मानविकी विद्यापीठ की निदेशक रहीं। सम्प्रति: सस्ता साहित्य मंडल की सदस्य सचिव।

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