MAIN EK HARFANMAULA

Format:Paper Back

ISBN:978-81-8143-935-2

Author:A.K. HUNGAL

Pages:144

MRP:Rs.250/-

Stock:Out of Stock

Rs.250/-

Details

इस पुस्तक का लोकार्पण भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा के हाथों हुआ था, और इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में मुझे भी बॉम्बे से आमन्त्रित किया गया था। अपना भाषण देने के बाद जब मैं मंच पर अपनी सीट पर वापस बैठा तो मैंने मि. घई को बिलकुल अपनी बगल में बैठे पाया। जल्दी ही हमारे बीच यह बात तय हो गयी कि मैं अपनी आत्मकथा लिखूँगा और वे उसे प्रकाशित करेंगे।

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About the writer

A.K. HUNGAL

A.K. HUNGAL जजों और डिप्टी-कमिश्नरों के खानदान से होने के बावजूद ए. के. हंगल ने एक दर्जी के रूप में अपनी ज़िन्दगी की शुरुआत करने का फैसला किया -बावजूद इसके की ब्रिटिश सरकार उन्हें उनके पिता की तरह एक प्रतिष्ठित पद पर नियुक्त करने के लिए तैयार थी । अपने मामा की उँगली छुड़ाकर भीड़ में 'खो गए' एक नन्हें और उत्साही बालक की तरह ए. के. हंगल जिन्दगी भर अपने इस 'खोएपन' का मजा लेते रहे हैं, और राजनीति से लेकर रंगमंच और सिनेमा तक हर क्षेत्र में अपनी बहुमुखी प्रतिभा के रंग बिखेरते रहे हैं । उनकी आत्माकथा हर तरह के पाठकों के लिए -खासकर प्रगतिशील विचारधारा थिएटर और सिनेमा में रूचि रखने वाले पाठकों के लिए -एक अत्यन्त रोचक, विचारोत्तेजक और आनंददायक अनुभव साबित हो सकती है । वाणी प्रकाशन ने वर्ष 2008 में इनकी आत्मकथा 'मैं एक हरफनमौला' प्रकाशित की थी।'पद्मभूषण' से सम्मानित एक समर्पित समाजसेवी, रंगकर्मी और फ़िल्म अभिनेता ने 26 अगस्त 2012 को दुनिया से अलविदा कह दिया ।

Books by A.K. HUNGAL

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