PRANO MAI DHULE HUE RANG

Format:Hard Bound

ISBN:81-7055-262-1

Author:FANISHWARNATH RENU

Pages:232

MRP:Rs.125/-

Stock:In Stock

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FANISHWARNATH RENU

FANISHWARNATH RENU जन्म: फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म 4 मार्च 1921 को औराडी हिंगन्ना, जिला पूर्णियां, बिहार में हुआ। जीवन: आप आजीवन शोषण और दमन के विरूद्ध संधर्षरत रहे। इसी प्रसंग में सोशलिस्ट पार्टी से जा जुड़े व राजनीति में सक्रिय भागीदारी की। 1942 के भारत-छोड़ो आंन्दोलन में सक्रिय भाग लिया। 1950 में नेपाली दमनकारी रणसत्ता के विरूद्ध सशस्त्र क्रांति के सूत्रधार रहे। 1954 में 'मैला आँचल' उपन्यास प्रकाशित हुआ तत्पश्चात् हिन्दी के कथाकार के रूप में अभूतपूर्व प्रतिष्ठा मिली। जे० पी० आन्दोलन में सक्रिय भागीदारी की और सत्ता द्वारा दमन के विरोध में पद्मश्री का त्याग कर दिया। हिन्दी आंचलिक कथा लेखन में सर्वश्रेष्ठ। देहांत: 11 अप्रैल, 1977 को पटना में अंतिम सांस ली। साहित्य सृजन: कहानी संग्रह: ठुमरी, अग्निख़ोर, आदिम रात्रि की महक, एक श्रावणी दोपहरी की धूप, अच्छे आदमी। उपन्यास: मैला आंचल, परती परिकथा, दीर्घतया, कलंक -मुक्ति, जुलूस, कितने चौराहे, पल्टू बाबू रोड। संस्मरण: ऋणजल--धनजल, वन तुलसी की गन्ध, श्रुत अश्रुत पूर्व। रिपोर्ताज: नेपाली क्रांति कथा। कहानी ‘मारे गये गुलफाम' पर बहुचर्चित हिन्दी फिल्म ‘तीसरी कसम' बनी जिसे अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए।

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