KAMRED MONALIJA TATHA ANYA SANSMARAN

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-144-5

Author:RAVINDRA KALIYA

Pages:232

MRP:Rs.395/-

Stock:In Stock

Rs.395/-

Details

कामरेड मोनालिजा तथा अन्य संस्मरण

Additional Information

साठोत्तरी पीढ़ी में रवीन्द्र कालिया अकेले ऐसे लेखक हैं जो अपने विट, हमर और अपनी खुशमिजाजी के लिए जाने जाते हैं। उनके ठहाके तो साहित्य जगत में मशहूर हैं ही, लेखन में भी उनकी चुटकियाँ लोगों को तिलमिलाते हुए मुस्कराने को मजबूर कर देती हैं। संगति में असंगति खोजना उनकी कला है और यह कला उनकी कहानियों और संस्मरणों दोनों में अपने शिखर पर पहुँची है। ट्रैजिक स्थितियों का कॉमिक चित्रण करते हुए वे अपने समय के सत्य से साक्षात्कार करते हैं। 'कामरेड मोनालिज़ा तथा अन्य संस्मरण' पुस्तक में उन्होंने ज्यादातर अपनी पीढ़ी के लेखकों पर संस्मरण लिखे हैं जो व्यक्तिचित्र के साथ-साथ सामाजिक असंगतियों के भी चित्र हैं। ये संस्मरण इस बात के भी गवाह हैं कि साठ की पीढ़ी के लेखकों के आपसी रिश्तों के बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। ज्यादातर संस्मरण इलाहाबाद के दौर के हैं जिनमें इलाहाबाद पूरी जिन्दादिली के साथ ठहाके लगाता दिखता है। संस्मरणों के मामले में उर्दू में मंटो का जवाब नहीं था इसलिए कि मंटो जिसके बारे में भी लिखते थे निधड़क होकर लिखते थे। हिन्दी में इस मामले में रवीन्द्र कालिया का भी जवाब नहीं है। इन संस्मरणों में वे दूसरों से ज्यादा अपने प्रति निर्मम हैं और यही इन संस्मरणों की सबसे बड़ी विशेषता है। हिन्दी साहित्य का एक पूरा दौर इन संस्मरणों में खिलता-खुलता है। यहाँ ज्ञानरंजन की फक्कड़ी है, तो अमरकान्त की संजीदगी भी, मोहन राकेश, श्रीलाल शुक्ल, कमलेश्वर, धर्मवीर भारती, कन्हैयालाल नन्दन, दूधनाथ सिंह, काशीनाथ सिंह, ममता कालिया, कुमार विकल, जगजीत सिंह, सतीश जमाली, गिरिराज किशोर, उपेन्द्रनाथ अश्क के अलावा बम्बई और जालन्धर की तमाम दोस्तयां और यादें इन संस्मरणों को इस पूरे दौर का एक ख़ास दस्तावेज़ बना देती हैं। - शशिभूषण द्विवेदी

About the writer

RAVINDRA KALIYA

RAVINDRA KALIYA जन्म : जालन्धर, 1938 निधन : दिल्ली, 2016 रवीन्द्र कालिया का रचना संसार कहानी संग्रह व संकलन : नौ साल छोटी पत्नी, काला। रजिस्टर, गरीबी हटाओ, बाँकेलाल, गली कूचे, चकैया नीम, सत्ताइस साल की उमर तक, रवीन्द्र कालिया की कहानियाँ, इक्कीस श्रेष्ठ कहानियाँ, चुनिन्दा प्रेम कहानियाँ, पाँच बेहतरीन कहानियाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ, मेरी प्रिय कहानियाँ। उपन्यास : ख़ुदा सही सलामत है, ए.बी.सी.डी, 17 | रानाडे रोड। संस्मरण : स्मृतियों की जन्मपत्री, कॉमरेड मोनालिसा, सृजन के सहयात्री, मेरे हमक़लम।। व्यंग्य-संग्रह : राग मिलावट मालकौंस, तेरा क्या होगा कालिया, नींद क्यों रात भर नहीं आती। सम्पादन : 'भाषा', 'धर्मयुग', 'वर्तमान साहित्य', वागर्थ', गंगा यमुना, नया ज्ञानोदय' पत्रिकाओं के सम्पादन के साथ-साथ बीस से अधिक पुस्तकों का सम्पादन जिनमें प्रमुख हैं, फ़ैज़ की सदी, अमरकान्त संचयन, उर्दू की। बेहतरीन कहानियाँ, हिन्दी की श्रेष्ठ प्रेम कहानियाँ और मण्टो की सदी। कई कहानियों, संस्मरणों का देशविदेश के विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में निर्धारण।। 'गालिब छुटी शराब' का पंजाबी व मलयालम भाषा में अनुवाद।

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