SARANSH… ALVIDA U.G.

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-281-0

Author:MAHESH BHATT

Pages:184

MRP:Rs.375/-

Stock:In Stock

Rs.375/-

Details

प्रसिद्ध है कि यू.जी. ने परम ज्ञान को अस्तित्व की नाड़ीगत और जैविक स्थिति माना है जिसका कोई धार्मिक, मनोवैज्ञानिक या रहस्यात्मक गूढ़ार्थ नहीं है। उन्होंने प्रवचन नहीं किये, संस्थाएँ नहीं बनायीं, सभाएँ नहीं कीं और हमेशा घोषित किया कि मनुष्य जाति के लिए उनका कोई सन्देश नहीं है। उन्हें ‘गुरुविरोधी’ के रूप में माना जाता है। वे ‘क्रोधावेश से ग्रस्त ऋषि’ हैं और ‘विचार को ठुकराने वाले विचारक’ हैं। मान्य विश्वासों को ध्वस्त करने में उन्होंने अपना जीवन लगा दिया। उन तमाम आधारों को ठुकरा दिया, जीने के लिए मनुष्य जिनका इस्तेमाल करता है। 22 मार्च 2007 की दोपहर में इटली के बैलेक्रोसिया नगर में यू.जी. का देहान्त हो गया।

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