KATHA- PATKATHA

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-091-3

Author:MANNU BHANDARI

Pages:216

MRP:Rs.250/-

Stock:In Stock

Rs.250/-

Details

मन्नू भण्डारी की यह पुस्तक-कथा-पटकथा कई कारणों से अत्यन्त महत्त्व की है, और सँजोकर रखने वाली है। हम सभी जानते हैं कि मन्नू जी हिन्दी की एक प्रतिष्ठित और चर्चित कथाकार हैं, पर, उनकी रचनात्मक दुनिया का एक और महत्त्वपूर्ण पक्ष रहा है-पटकथा लेखन का, जो अगर ओझल ा विस्मृत नहीं हुआ था। यह पुस्तक इस ओर भी हमारा ध्यान खींचती है, भले प्रकारान्तर से, कि साहित्यिक कृतियों की पटकथाएँ संकलित और प्रकाशित भी होनी चाहिए क्योंकि जिन कथाओं-उपन्यासों पर वे आधारित होती हैं, या किसी रचनाकार द्वारा नये सिरे से लिखी जाती हैं, उनका पटकथा-रूप हमें उनके एक नये प्रकार के पाठ का अवसर देता है।

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About the writer

MANNU BHANDARI

MANNU BHANDARI Born: April 3, 1931 भानपुरा, मध्य प्रदेश में 3 अप्रैल, 1931 को जन्मी मन्नू भंडारी को लेखन-संस्कार पिता श्री सुखसम्पतराय से विरासत में मिला। स्नातकोत्तर के उपरान्त लेखन के साथ-साथ वर्षों दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस में हिन्दी का अध्यापन। विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में प्रेमचन्द सृजनपीठ की अध्यक्ष भी रहीं। 'आपका बंटी’ और 'महाभोज’ आपकी चर्चित औपन्यासिक कृतियाँ हैं। अन्य उपन्यास हैं 'एक इंच मुस्कान’ (राजेन्द्र यादव के साथ) तथा 'स्वामी’। ये सभी उपन्यास 'सम्पूर्ण उपन्यास’ शीर्षक से एक जिल्द में भी उपलब्ध है। कहानी संग्रह हैं : एक प्लेट सैलाब, मैं हार गई, तीन निगाहों की एक तस्वीर, यही सच है, त्रिशंकु, तथा सभी कहानियों का समग्र 'सम्पूर्ण कहानियाँ’, एक कहानी यह भी उनकी आत्मकथ्यात्मक पुस्तक है जिसे उन्होंने अपनी 'लेखकीय आत्मकथा’ कहा है। महाभोज, बिना दीवारों के घर, उजली नगरी चतुर राजा नाट्य-कृतियाँ तथा बच्चों के लिए पुस्तकों में प्रमुख हैं—आसमाता (उपन्यास), आँखों देखा झूठ, कलवा (कहानी) आदि।

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