HINDU

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-159-6

Author:DR. SHARANKUMAR LIMBALE

Pages:152

MRP:Rs.250/-

Stock:Out of Stock

Rs.250/-

Details

अयोध्या में राम मन्दिर बनाने के प्रश्न पर हिन्दू संगठनों ने जमीन-आसमान एक किया और कार सेवकों ने बाबरी मस्जिद ध्वस्त कर दी। इस घटना के बाद देश का सामाजिक वातावरण बदलने लगा। मुम्बई में हुए दंगे, बम-विस्फोट, कश्मीर में चल रही आतंकवादी कार्रवाइयाँ, संसद पर हुआ आक्रमण आदि से देश की शान्ति खतरे में पड़ गयी। राजनीतिक दहशतगर्दों ने इस देश के सौहार्द को खून में डुबो दिया। इस दहशतगर्दी के विरोध में चर्चाएँ शुरू हुयी। राजनीतिक दहशतगर्दी ने पूरे विश्व को ही अपने घेरे में ले लिया। हिन्दू समाज का विषम ताना-बाना और विकृत जाति व्यवस्था-इन दोनों का पोस्टमार्टम करने हेतु ही यह ‘हिन्दू’ उपन्यास लिखा गया है। इस देश पर जाति व्यवस्था का जो कलंक है, उसे मिटाए बगैर यह देश सुन्दर नहीं हो सकेगा। जाति व्यवस्था के खिलाफ बोलने का अर्थ है राष्ट्रीय एकता की, सौन्दर्य की भाषा बोलना।

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About the writer

DR. SHARANKUMAR LIMBALE

DR. SHARANKUMAR LIMBALE 1 जून, 1956 को जन्मे डॉ. शरणकुमार लिंबाले ने एम.ए. , पीएच.डी. की शिक्षा प्राप्त की है। ‘अक्करमाशी’ (आत्मकथा) , ‘‘छुआछूत’, ‘‘देवता आदमी’, ‘‘दलित ब्राह्मण’ (कहानी संग्रह) , ‘दलित साहित्य का सौन्दर्यशास्त्र’ (समीक्षा) , ‘नरवानर’, ‘हिंदू’, ‘बहुजन’ (उपन्यास) आपकी हिन्दी में प्रकाशित कृतियाँ हैं। आप नासिक (महाराष्ट्र) के यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी में विद्यार्थी कल्याण विभाग के प्रोफेसर और डायरेक्टर हैं।

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