BHARTIYA DALIT SAHITYA : PARIPREKSHYA

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-836-2

Author:ED. KAMLA PRASAD

Pages:586

MRP:Rs.450/-

Stock:In Stock

Rs.450/-

Details

वामपन्थी राजनीति का हिन्दुस्तान में दृश्य, लोकोन्मुख, धर्मनिरपेक्ष किन्तु अस्तव्यस्त रहा है। वह टूट-टूटकर सिकुड़ता भी गया है। एक जमाने में किसान मजदूरों-उद्योग-मजदूरों के सबसे बड़े संगठन इनके पास थे। अब छोटे हो गये। इनकी लड़ाई गरीबों-मजदूरों-दलितों के लिए है, पर तीनों के लोग उनमें कम होते गये। युवा पीढ़ी का शामिल होना रुका। महिलाओं के संघर्ष का नेतृत्व न कम्युनिस्टों के पास आया है और न दलितों के। दलितों ने सामाजिक संघर्ष शुरू किया है। वे समाज में बराबरी की हैसियत चाहते हैं पर हुआ यह कि जो पढ़-लिख गये उनमें अधिकांश ओहदों में आ गये, उन्हें आधी-अधूरी हैसियत मिली और वे त्रिशंकु होते गये।

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