TELEVISION CHUNUOTIYAN AUR SAMBHAVNAYEN

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-915-4

Author:GORISHANKAR RAINA

Pages:

MRP:Rs.350/-

Stock:In Stock

Rs.350/-

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टेलीविजन चुनौतियाँ और संभावनाएं

Additional Information

आज देश की आधी आबादी टेलीविजन देखती है। तीन चौथाई लोगों को टेलीविज़न की प्रामाणिकता पर पूरा भरोसा है किन्तु भारत की निरक्षर आबादी टेलीविज़न पर दी जा रही खबरों को सच नहीं मानती। सूचना-तन्त्र के माध्यम से निरक्षर आबादी तक जानकारी पहुँचाना आज एक बड़ी चुनौती है। टेलीविजन, प्रभावी रूप से ऐसे कार्यक्रम प्रस्तुत कर सकता है जिनसे ग्रामीण क्षेत्रों को लाभ होगा। इस प्रकार के कार्यक्रम SITE के दौरान चलाये गये थे। ये कार्यक्रम नासा के सैटलाइट द्वारा, दूरदर्शन के माध्यम से, 2400 गाँवों में दिखाये गये थे। बदलते परिदृश्य में डी.टी.एच., केबल टीवी को चुनौती देने लगा है, परन्तु 'मल्टीसिस्टम' भविष्य में अधिक लोकप्रिय हो सकता है जो एक साथ टेलीविजन, टेलीफोन और इंटरनेट सेवाएँ उपलब्ध कराएगा। बदलते परिदृश्य में टेलीविजन मात्र पैसा बनाने वाला उद्योग नहीं हो सकता। जिस प्रकार इसने एक कारगर मार्किटिंग तन्त्र स्थापित करने में सफलता पाई है उसी प्रकार दर्शकों में सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से एक निश्चित सोच पैदा करने में यह अग्रिम हो सकता है। वाणिज्य और सैटलाइट चैनलों की नयी अर्थ-व्यवस्था से पैदा हुई चुनौतियों के बीच सामाजिक का दायित्व निभाया जा सकता है। 'कल्चरल इंडस्ट्री' द्वारा निर्मित कृतियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि भविष्य में गेम शो, क्विज, सिटकॉम, सोप ऑपेरा, टेलीफिल्में, बच्चों के कार्यक्रम, समाचार-शो, नये प्रारूपों में प्रस्तुत होते रहेंगे। अतः टेलीविजन, लोकप्रिय संस्कृति के रूप में दर्शकों के विश्वास, व्यवहार और मनोभावों को प्रभावित करता रहेगा तथा नयी टेक्नोलॉजी के साथ-साथ दर्शकों की पसन्द-नापसन्द इसके भविष्य का रूप-आकार निर्धारित करेगी।

About the writer

GORISHANKAR RAINA

GORISHANKAR RAINA गौरीशंकर रैणा जन्म : 5 फरवरी 1954, श्रीनगर (कश्मीर) दौये वैले बर्लिन तथा एशियन मीडिया कम्यनिकेशन सेंटर सिंगापर से टेलीविज़न नाटकों के निर्देशन में प्रशिक्षित। एडवांस डिप्लोमा (मीडिया) के साथ ही फ़िल्म टी.वी. संस्थान पूणे से टेलीविजन कार्यक्रम निर्देशन में प्रशिक्षित। एन.एफ.डी.सी. की फ़िल्मों के लिए संवाद लेखन तथा रेडियो के लिए कई नाटकों का रूपांतर। टेलीविज़न नाटकों, वृत्तचित्रों तथा लाइव शोज का निर्देशन। प्रमुख टेलीफ़िल्में तथा नाटक- 'भीगी धूप', 'चीफ़ की दावत', 'शहनशाह इडियस', 'अनुभूति', 'खंडहर', 'विदाई', 'बंधन' तथा 'आख़िरी फैसला' 1450 से अधिक टेलीविज़न लाइव शोज़ का निर्देशन। वृत्तचित्र 'ओड ट पीस' के लिए लोक सेवा प्रसारण परस्कार। दूरदर्शन के लिए ही निर्देशित एक अन्य फ़िल्म 'द गोल्डन आर्ट' अंतर्राष्ट्रीय समारोहों में प्रदर्शित। कृतियाँ : 'एक वही मैं', (तीन लघु नाटकों का संकलन) 'संचार टेक्नोलॉजी' (शोधग्रंथ), 'यह राजधानी' (कहानी संग्रह का अनुवाद) 'पालने का पत' (बहचर्चित कश्मीरी नाटक का हिन्दी अनुवाद), कहानियों, लेख, एवं नाट्य अनुवाद विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। पुरस्कार : मानव संसाधन विकास मंत्रालय के केन्द्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा हिंदीतर भाषी हिंदी साहित्यकार सम्मान (1990-9101 संस्कति मंत्रालय द्वारा टेलीविजन नाटकों के लिए सीनियर फलोशिप। जम्मू-कश्मीर संस्कृति, कला एवं साहित्य अकादमी द्वारा रंगमंच प्रस्तुतियों के लिए सम्मानित। संप्रति : दिल्ली दूरदर्शन में कार्यक्रम अधिकारी।

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