SAMKALEEN VAISHVIK PATRAKARITA MEIN AKHBAR

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-447-7

Author:PRANJAL DHAR

Pages:180

MRP:Rs.595/-

Stock:In Stock

Rs.595/-

Details

आज विश्व में, ख़ासकर तीसरी दुनिया में, एक व्यापक मीडिया साक्षरता अभियान चलाने की सख़्त ज़रूरत है। इस अभियान में ऑडियंस को मीडिया के सन्देशों की बारीकी से पड़ताल करने, उन्हें आलोचनात्मक दृष्टि से ग्रहण करने और सचेत दर्शक-पाठक-श्रोताओं की तरह प्रतिक्रिया करने के लिए तैयार किया जाना चाहिए। उन्हें इस बात के लिए भी तैयार किया जाना चाहिए कि वे मीडिया के उन सन्देशों के विरुद्ध उचित मंचों पर शिकायत भी करें जिन्हें वे व्यापक जनहित में नहीं देखते हैं। यह तभी सम्भव है जब मीडिया को गम्भीरता से देखने और उस पर लिखने वाले लोग सामने आयें। ऐसे मीडिया आलोचकों की आज बहुत ज़रूरत है जो ऑडियंस को मीडिया के एक सतर्क और सतेज उपभोक्ता और नागरिक के सरोकारों से लैस कर सकें।

Additional Information

प्रांजल धर एक ऐसे युवा मीडिया क्रिटिक हैं जिन्होंने मीडिया और पत्राकारिता की शिक्षा लेने के बाद इस क्षेत्र में कदम रखा है और मीडिया साक्षरता के काम को आगे बढ़ा रहे हैं। इन्होंने ‘नया ज्ञानोदय’ जैसी अनेक महत्त्वपूर्ण पत्रिकाओं में लगातार मीडिया के विभिन्न पहलुओं पर गहराई और व्यापक परिप्रेक्ष्य के साथ लिखा है। जिस प्रौढ़ता के साथ इन्होंने लिखा है, वह सराहनीय है। इनके मीडिया सम्बन्धी लेखन की एक ख़ास बात यह भी है कि ये सिर्फ समाचार मीडिया पर ही नहीं बल्कि मनोरंजन माध्यमों पर भी समान अधिकार से लिखते हैं। उम्मीद है कि इस पुस्तक का सुधी पाठक स्वागत करेंगे। यह पुस्तक न सिर्फ मीडिया के विद्यार्थियों, अध्येताओं और शोधार्थियों के लिए उपयोगी है बल्कि इसका फ़ायदा वे आम दर्शक-पाठक-श्रोता भी उठा सकते हैं जो मीडिया को और गहराई से समझना चाहते हैं। प्रांजल धर से भविष्य में भी मीडिया के अन्य पहुलओं पर ऐसी ही और पुस्तकों की अपेक्षा बनी रहेगी।

About the writer

PRANJAL DHAR

PRANJAL DHAR जन्म: मई 1982 ई. में, उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले के ज्ञानीपुर गाँव में। शिक्षा: स्नातक, इलाहाबाद विश्वविद्यालय से। भारतीय जनसंचार संस्थान, जे.एन.यू. कैम्पस, नयी दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार (हरियाणा) से जनसंचार एवं पत्रकारिता में परास्नातक। रुचियाँ एवं गतिविधियाँ: देश की सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ, आलेख और समीक्षाएँ तथा अन्य रचनाएँ प्रकाशित। बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम और वेबदुनिया डॉट कॉम समेत अनेक वेबसाइटों पर लेखों व कविताओं का प्रकाशन। राष्ट्रकवि दिनकर की जन्मशती के अवसर पर ‘समर शेष है’ पुस्तक का सम्पादन। भारतीय ज्ञानपीठ की मासिक पत्रिका ‘नया ज्ञानोदय’ में विगत सात वर्षों से मीडिया पर नियमित स्तम्भकार। कुछ प्रतिष्ठित राष्ट्रीय दैनिकों के लिए पत्रकारिता व स्तम्भ लेखन। अनेक महत्त्वपूर्ण पुस्तकों में लेखों का चयन व प्रकाशन। आकाशवाणी समेत प्रसारण माध्यम के अनेक चैनलों से कविताएँ प्रसारित। देश भर के अनेक मंचों से कविता पाठ। कुछ कविताएँ अन्य भारतीय भाषाओं में अनूदित। मध्य पूर्व के अनेक देशों की कविताओं का हिन्दी में अनुवाद। अनेक विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय महत्त्व के संस्थानों में व्याख्यान। पूर्वोत्तर भारत में शान्ति के लिए जारी जुझारू आन्दोलन में ‘शान्ति साधना आश्रम’ के साथ मिलकर कार्य। जल, जंगल और ज़मीन के लिए संघर्षरत वंचितों के संगठन ‘एकता परिषद’ के लिए अनेक कार्य। पुस्तक संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ स्मृति न्यास द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी पुस्तकालय अभियान से गहन सम्बद्धता। पुरस्कार व सम्मान: राजस्थान पत्रिका पुरस्कार 2006, अवध भारती सम्मान 2010 तथा वर्ष 2010 के लिए भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय का पत्रकारिता एवं जनसंचार से सम्बन्धित प्रतिष्ठित भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार। सम्प्रति: भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मन्त्रालय में ग्रुप-‘बी’ सेवा में कार्यरत। स्वतन्त्र लेखन।

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