JAYSI GRANTHAWALI

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ISBN:81-8143-618-0

Author:AACHARYA RAMCHANDRA SHUKLA

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MRP:Rs.500/-

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जायसी ग्रंथावली

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AACHARYA RAMCHANDRA SHUKLA

AACHARYA RAMCHANDRA SHUKLA आचार्य रामचन्द्र शुक्ल शुक्लजी का जन्म बस्ती जिले के अगोना गाँव में सन् 1884 में हुआ था और निधन सन् 1941 में। आत्मसम्मान, सहजता, प्रकृति प्रेम तथा गण-दोष की विवेचना शक्ति आदि गण उनके व्यक्तित्व का महत्त्वपर्ण हिस्सा थे। शुक्लजी के सम्पादक जीवन की शुरुआत विद्यार्थी जीवन में ही बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' की 'आनन्द कादम्बिनी' में कार्य करते हए हुई। कुछ समय के लिए उन्होंने 'काशी नागरी प्रचारिणी पत्रिका' का सम्पादन भी किया। प्रारम्भ में उन्होंने दो-तीन नाटक-प्रहसन लिखे। 'भारत में वसन्त' और 'मनोहर छटा' कविताएँ भी लिखीं। उनकी प्रमुख कतियाँ इस प्रकार हैं-इतिहास-'हिन्दी साहित्य का इतिहास': आलोचना-'जायसी', 'तलसीदास', 'सूरदास', रस मीमांसा': निबन्ध-'चिन्तामणि भाग-1, भाग-2: कविता-'मध स्त्रोत': सम्पादन- 'भ्रमरगीत सार', 'जायसी ग्रन्थावली', 'वीर सिंहदेव चरित', 'भारतेन्दु संग्रह', 'विश्व प्रपंच', 'आदर्श जीवन', 'कल्पना का आनन्द'। रामचन्द्र शुक्ल ने निबन्धों को बौद्धिक धरातल और समालोचना को सामाजिक व मनौवैज्ञानिक आधार दिया। विचारों के क्षेत्र में उन्होंने लोक सिद्धान्त और लोक भावना को नहीं भुलाया। इसीलिए साहित्य को मनोरंजन की परिधि से निकालकर गम्भीर व व्यापक दायित्वोध से जोड़ा। वस्तुतः आचार्य शुक्ल ने आधुनिक हिन्दी गद्य को जो विशिष्टता, व्यापकता, उदात्तता और मजबूती दी है, हिन्दी संसार उसके लिए सदैव ऋणी रहेगा। वे अपनी उपमा स्वयं हैं। आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने ठीक ही कहा था- 'हिन्दी संसार में शक्लजी अपने ढंग का एक और अद्वितीय व्यक्तित्व लेकर अवतीर्ण हुए थे।'

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