RAHEEM GRANTHAWALI

Format:Hard Bound

ISBN:81-903158-2-X

Author:ED. VIDHYANIWAS MISHRA

Pages:182

MRP:Rs.350/-

Stock:Out of Stock

Rs.350/-

Details

रहीम ग्रन्थावली

Additional Information

रहीम का संवदेनशील एवं सचेतनशील व्यक्तित्व था। कूटनीति और युद्धोन्माद के विषम परिवेश ने उनकी संवेदनशीलता को नष्ट नहीं किया था। इससे उनके अनुभव समृद्ध हुए हैं तथा मानव प्रकृति को समझने का अच्छा अवसर मिला है। वे स्वयं रचनाधर्मिता की ओर उन्मुख हुए ही, साथ ही अकबर के दरबार को कवियों और शायरों का केन्द्र बना दिया। अकबर की धार्मिक सहिष्णुता और उदारवादी नीति ने उनदरारों को पाटने का कार्य किया जे दो सम्प्रदायों के बीच चौड़ी व गहरी होती जा रही थी। रहीम जन्म से तुर्क होते हुए भी पूरी तरह भारतीय थे। भक्त कवियों जैसी उत्कट भक्ति-चेतना भारतीयता और भारतीय परिवेश से गहरा लगाव उनके तुर्क होने के अहसास को झुठलाता सा प्रतीत होता है।

About the writer

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality