AMIR KHUSRAU KA HINDVI KAVYA

Format:Hard Bound

ISBN:81-7055-816-6

Author:GOPI CHAND NARANG

Pages:

MRP:Rs.350/-

Stock:In Stock

Rs.350/-

Details

...प्रोफेसर गोपीचन्द नारंग ने केवल श्प्रिंगर संग्रह की प्रति से प्राप्त पहेलियों को ही इस पुस्तक में एकत्र नहीं किया वरन् उन्होंने अपनी पुस्तक में भूमिका लिखकर अमीर खुसरो तथा उनके काव्य के संबंध में प्रचलित भ्रांतियों का निराकरण भी किया है ंएक सौ ग्यारह पृष्ठ के इस सारगर्भित भूमिका को पढ़कर पाठक को अमीर खुसरो की रचना-प्रक्रिया तथा रचित साहित्य की पूरी जानकारी हासिल हो जाता है। मैं प्रोफेसर नारंग के इस काव्य को स्तरीय शोध कार्य मानता हूं और मेरा विश्वास है कि भविष्य में हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखकों को इस गं्रथ से खड़ी बोली का स्वरूप निर्धारण करने में सहायता मिलेगी।

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About the writer

GOPI CHAND NARANG

GOPI CHAND NARANG प्रो. गोपीचन्द नारंग उर्दू के अन्यतम साहित्यिक, समालोचक तथा बुद्धिजीवी हैं। आलोचना, शोध, भाषा-विज्ञान तीनों में निष्णात प्रो. नारंग पैंतालीस से भी ज्यादा पुस्तकों के लेखक एवं संपादक हैं। मौलिक एवं अंतर्दृष्टिपूर्ण लेखन के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा आपको पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने भी ‘तमग़-ए-इम्तियाज़’ प्रदान कर आपकी बौद्धिक एवं साहित्य-सेवाओं को स्वीकार किया। आपको लखनऊ का ‘उर्दू-हिन्दी साहित्य कमेटी पुरस्कार’ (1984) और ‘ग़ालिब पुरस्कार’ (1985) भी प्राप्त हैं। इनके अलावा ‘अमीर खुसरों सम्मान’ (शिकागो, 1986) ‘कनाडा उर्दू पुरस्कार’ (टोरंटो, 1987) और उत्तरप्रदेश उर्दू अकादमी के ‘अखिल भारतीय मौलाना अबुल कलाम आजाद पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया। आपकी उर्दू किताब साख्तियात पस साख़्तियात और मशरिकी शेरियात को साहित्य अकादेमी पुरस्कार (1985) प्रदान किया गया।

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