KHATTE....KHAARE....KHURKHURE

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-183-9

Author:LATA SHARMA

Pages:

MRP:Rs.250/-

Stock:In Stock

Rs.250/-

Details

खट्टे खारी खुरखुरे

Additional Information

वर्तमान हिन्दी साहित्य के अबूझ संसार को हम कुछ बेहद जायज़ से प्रतीत होते नाजायज़ कारणों से दो हिस्सों में विभाजित कर सकते हैं- महानगरीय लेखक तथा छोटे शहरों-कस्बों तथा गांव-खेड़े वाले लेखक। आपका लेखन महत्त्वपूर्ण नहीं। महत्त्वपूर्ण हैं आपकी साहित्येतर हलचलें तथा हरकतें। महत्त्वपूर्ण है जुगाड़बंदी, पुरस्कार, संवादन आदि की गांगोत्री के आसपास मंडराते रहना। इस 'गटरगंगा' पर कब्ज़ा प्रायः उन महानगरीय कलमकारों का है, जो गंगोत्री पर ही गंगा को मैली करने की जानकर हिंदी में घुले हैं। हिंदी साहित्य में छीना छपटा-सा' परंतु महत्त्वपूर्ण स्थान बनाने के लिये आपका राजधानी के दीवाने-ख़ास की अंतरंग महफ़िलों में होना-दिखाना-रहना-सोना लाजिमी है। ज़िक्र ऐसों का ही होता है। दुशाले इनको ही दिये जाते हैं। राजसभा इनको ही सम्मानित करती है। गांव-खेड़े में खटकर -लेखन की तपस्या' के बचकाने क़स्बई भ्रम में मुज्तिला लेखकों के ऊपर तिरस्कार, विस्मृति तथा अपरिचय की दीमक की बांबी बन जाती। है। फिर आप लिखते रहें, परंतु सही स्थानों पर कोई आपका नोटिस ही नहीं होता।

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LATA SHARMA

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