BAAT YE HAI KI...

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-842-3

Author:MANOHAR SHYAM JOSHI

Pages:226

MRP:Rs.395/-

Stock:In Stock

Rs.395/-

Details

बात यह है कि... किताब का शीर्षक, कुछ ख़ास तरह की स्मृतियों से छनकर आया है। दरअसल, मनोहर श्याम जोशी जब किसी विषय, मुद्दे या किससी संदर्भ पर ठिठकते, थोड़ा सोचते और फिर बोलते-बात यह है कि...। यह उनका बाज वक्ती (कभी-कभार का) तकिया कलाम था। ‘बात ये है कि...’ कहते हुए वो दुनिया-जहान के सिकी भी विषय, किसी भी सूत्र, किसी भी सोच, किसी भी मसले, किसी भी किताब या सेलीब्रेटी या सियासत या समाज आदि पर बेबाक और बेतकल्लुफ लहजे में बोल सकते थे। वो अपने आपमें इनसाइक्लोपीडिया थे। खिलंदड़ी जबान के जरिए, वो सामाजिक मूल्यहीनता के धुर्रे उड़ा देते थे। फैशन, फिल्म, कविता, उपन्यास, नाटक, यहां तक कि अध्यात्म पर भी किसी अध्येता, किसी चिंतक, किसी समाजशास्त्री और किसी आलोचक की तरह साधिकार लिख सकते थे।

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About the writer

MANOHAR SHYAM JOSHI

MANOHAR SHYAM JOSHI मनोहर श्याम जोशी 9 अगस्त, 1933 को अजमेर में जन्मे, लखनऊ विश्वविद्यालय के विज्ञान स्नातक मनोहर श्याम जोशी ‘कल के वैज्ञानिक’ की उपाधि पाने के बावजूद रोजी-रोटी की खातिर छात्रा जीवन से ही लेखक और पत्राकार बन गये। अमृतलाल नागर और अज्ञेय इन दो आचार्यों का आषीर्वाद उन्हें प्राप्त हुआ। स्कूल मास्टरी, क्लर्की और बेरोजगारी के अनुभव बटोरने के बाद अपने 21वें वर्श से वह पूरी तरह मसिजीवी बन गये। प्रेस, रेडियो, टी.वी., वष्त्तचित्रा, फिल्म, विज्ञापन-सम्प्रेशण का ऐसा कोई माध्यम नहीं जिसके लिए उन्होंने सफलतापूर्वक लेखन-कार्य न किया हो। खेल-कूद से लेकर दर्शनशास्त्र तक ऐसा कोई विशय नहीं जिस पर उन्होंने कलम न उठाई हो। आलसीपन और आत्मसंशय उन्हें रचनाएँ पूरी कर डालने और छपवाने से हमेशा रोकता चला आया है। पहली कहानी तब छपी थी जब वह अठारह वर्श के थे लेकिन पहली बड़ी साहित्यिक कृति प्रकाशित करवाई जब सैंतालीस वर्श के होने आये। केन्द्रीय सूचना सेवा और टाइम्स ऑफ इंडिया समूह से होते हुए सन् 1967 में हिन्दुस्तान टाइम्स प्रकाशन में साप्ताहिक हिन्दुस्तान के सम्पादक बने और वहीं एक अंग्रेजी साप्ताहिक का भी सम्पादन किया। टेलीविजन धारावाहिक ‘हम लोग’ लिखने के लिए सन् 1984 में सम्पादक की कुर्सी छोड़ दी और तब से स्वतन्त्रा लेखन करते रहे । निधन: 30 मार्च 2006।

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