AGYEYA : KAVI AUR KAVYA

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ISBN:81-7055-761-5

Author:DR. RAJENDRA PRASAD

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MRP:Rs.195/-

Stock:In Stock

Rs.195/-

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अज्ञेय एक ऐसे सर्जक साहित्यकार हैं, जिनकी सर्जक-मनीषा सृजन की विभिन्न दिशाओं में न केवल प्रवेश करती है बल्कि प्रत्येक दिशा में लीक तोड़ती है, नयी राहों का अन्वेषण करती है, नया रचती है। उपन्यास हो, कहानी हो, कविता हो, यात्रा-वृत्तांत हो, पत्रकारिता अथवा संपादन का क्षेत्र हो, सर्वत्र उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है। उनकी दृष्टि में सर्जक स्रष्टा, द्रष्टा और दाता होता है। वे अपनी इस मान्यता पर सही उतर हैं। उन्हें निःसंकोच सर्जक-मनीषा का प्रतीक-पुरुष कहा जा सकता है। सिसृक्षा का दबाव और ताप निरंतर अनुभव करते रहन उनकी प्रकृति का अभिन्न अंग रहा है। कवि अज्ञेय के साक्ष्य से हम जानते हैं कि रचना हमें मुक्त करती है, रचना कुछ कहती नहीं करती है, रचना हमें बदल देती है।

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About the writer

DR. RAJENDRA PRASAD

DR. RAJENDRA PRASAD शिक्षा: 1966 में रामजस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए.। दिल्ली विश्वविद्यालय से ही एम. लिट्. एवं पी.एच.डी.। एम.लिट्. के शोध का विषय: ‘अज्ञेय, मुक्तिबोध एवं गिरिजाकुमाार माथुर का काव्य।’ पी-एच.डी. का विषय: ‘तार सप्तक’ के कवियों की समाज-चेतना।’ कार्यक्षेत्र: सितंबर, 1966 से दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन। अध्ययन-अध्यापन एवं लेखन का विशेष क्षेत्र नयी कविता एवं नाटक। ध्वनि-रूपक लेखन में सक्रिय। लगभग पाँच दर्जन ध्वनि-रूपक आकाशवाणी के विभिन्न एकांशों से प्रसारित।

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