BAKSHI JI-MERE DADAJI

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ISBN:81-7055-170-6

Author:ED. NALINI SRIVASTAV

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MRP:Rs.100/-

Stock:In Stock

Rs.100/-

Details

‘‘अतीत की स्मृति, वर्तमान की चिन्ता और भविष्य की आशंका तीनों एक स्वप्न का ऐसा जाल गूँथ देती हैं कि उसमें बद्ध होकर हम अपने यथार्थ जीवन के कटु अस्तित्व को भी भूल जाते हैं।’’ ‘‘मृत्यु सभी के सिर पर नाच रही है पर हम सभी अपने इस नश्वर शरीर की क्षणिक कामनाओं में ही लीन रहते हैं। संसार में जो सबसे आदरणीय होते हैं वे भी मरते हैं और जो सबसे अधिक तिरस्करणीय होते हैं, वे भी मरते हैं। किसी एक के चले जाने के बाद हम सब यह भले ही कहते हैं कि इनके अभाव की पूर्ति नहीं होगी, पर आज तक किसी के न रहने से संसार का कोई काम नहीं रुका है।’’ ‘‘लिखने की भी एक कला होती है। सभी साहित्य विशारद लेखक नहीं होते। साहित्य के क्षेत्र में कितने ही ऐसे लोगों ने अक्षय कीर्ति प्राप्त कर ली है जिन्होंने साहित्य की कोई उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं की थी।’’

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