BADE BHAYI

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-987-1

Author:DR.RAMVILAS SHARMA

Pages:328

MRP:Rs.325/-

Stock:In Stock

Rs.325/-

Details

हिन्दी गद्य को रामविलास शर्मा का योगदान ऐतिहासिक है। तर्क और तथ्यों से भरी हुई साफ पारदर्शी भाषा रामविलास जी के गद्य की विशेषता है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उनकी यह विशेषता उनके परिवार के सदस्यों के गद्य में भी बड़े पैमाने पर पायी जाती है, और इस तरह हिन्दी गद्य का ‘रामविलास घराना’ एक नया मुहावरा बनता है। इस घराने के बड़े सदस्य ‘बड़े भाई’ के गद्य का संग्रह है यह पुस्तक। पुस्तक में ‘बड़े भाई’ ने अपने जीवन संघर्ष, पारिवारिक परिस्थिति, यात्रा विवरण और बातचीत के द्वारा मध्य वर्ग के जटिल संसार को रेखांकित किया है। पुस्तक में बडे़ भाई की जिन्दगी का पारिवारिक परिवेश रामविलास जी का भी परिवेश है। इसलिए रामविलास जी का जीवन भी इस पुस्तक में शामिल है। ‘घर की बात’ पुस्तक का अगला चरण है ‘बड़े भाई’ जिसमें हिन्दी गद्य के प्रस्तुतीकरण का नया रूप सामने आया है।

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About the writer

DR.RAMVILAS SHARMA

DR.RAMVILAS SHARMA "डॉ॰ रामविलास शर्मा (10 अक्टूबर, 1912- 30 मई, २०००) आधुनिक हिन्दी साहित्य के सुप्रसिद्ध आलोचक, निबंधकार, विचारक एवं कवि थे। व्यवसाय से अंग्रेजी के प्रोफेसर, दिल से हिंदी के प्रकांड पंडित और महान विचारक, ऋग्वेद और मार्क्स के अध्येता, कवि, आलोचक, इतिहासवेत्ता, भाषाविद, राजनीति-विशारद ये सब विशेषण उन पर समान रूप से लागू होते हैं। उन्नाव जिला के उच्चगाँव सानी में जन्मे डॉ॰ रामविलास शर्मा ने लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए. तथा पी-एच.डी. की उपाधि सन् 1938 में प्राप्त की। सन् 1938 से ही आप अध्यापन क्षेत्र में आ गए। 1943 से 1974 तक आपने बलवंत राजपूत कालेज, आगरा में अंग्रेजी विभाग में कार्य किया और अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष रहे। इसके बाद कुछ समय तक कन्हैयालाल माणिक मुंशी हिन्दी विद्यापीठ, आगरा में निदेशक पद पर रहे। 1970 'निराला की साहित्य साधना' के लिये साहित्य अकादमी पुरस्कार. 1999 'भारत के प्राचीन भाषा परिवार और हिन्दी' के लिये व्यास सम्मान. "

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