AMRITA

Format:Hard Bound

ISBN:81-7055-280-X

Author:SHIV PRASAD SINGH

Pages:187

MRP:Rs.200/-

Stock:In Stock

Rs.200/-

Details

मेरी अब तक ही प्रकाशित सम्पूर्ण कहानियाँ तीन खण्डों में प्रकाशित हो रही हैं, पहला खण्ड ‘अन्धकूप’, दूसरा ‘एक यात्रा सतह के नीचे’ और तीसरा ‘अमृता’। वस्तुतः मेरी अधिकांश कहानियाँ ग्राम जीवन की तमाम विरूपता, गरीबी और जहालत को समेटे हुए हैं। ऐसा नहीं कि आज का ग्राम जीवन सिर्फ अन्धकूप की ही संज्ञा पा सकता है, उसमें अब भी वैसा बहुत कुछ है जो जीवन में आलोक बिन्दु का कार्य कर सकता है। मेरी कहानियों पर अब तक बहुत कुद लिखा गया है; पर प्रायः आंचलिक कहकर पिण्ड छुड़ाने की कोशिश की जाती रही है। प्रेमचन्द के बाद इतने विस्तृत और यथार्थ फलक पर पहली बार ग्राम जीवन को देखने की चुनौती स्वीकार करने के इस प्रयतन को उसके सही परिप्रेक्ष्य में वही देख सकता है जो आज के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक अन्तर्विरोधों को देखने की सही दृष्टि रखती है।

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About the writer

SHIV PRASAD SINGH

SHIV PRASAD SINGH डॉ. शिवप्रसाद सिंह 19 अगस्त 1928 को जलालपुर, जमनिया, बनारस में पैदा हुए शिवप्रसाद सिंह ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से 1953 में एम.ए. (हिन्दी) किया। 1957 में पीएच.डी.। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में ही अध्यापक नियुक्त हुए, जहाँ प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष भी रहे। शिक्षा जगत के जाने-माने हस्ताक्षर शिवप्रसाद सिंह का साहित्य की दुनिया में भी उतना ही ऊँचा स्थान है। प्राचीन और आधुनिक दोनों ही समय के साहित्य से अपने गुरु पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी की तरह समान रूप से जुड़े शिवप्रसादजी 'नयी कहानी' आन्दोलन के आरम्भकर्ताओं में से हैं। कुछ लोगों ने उनकी ‘दादी माँ' कहानी को पहली ‘नयी कहानी' माना है। व्यास सम्मान, साहित्य अकादेमी पुरस्कार आदि अनेक पुरस्कारों से सम्मानित। कुछ अन्य पुस्तकें अन्धकूप (सम्पूर्ण कहानियाँ, भाग-1), एक यात्रा सतह के नीचे (भाग-2) अमृता (भाग-3); अलग-अलग वैतरणी, गली आगे मुड़ती है, शैलूष, मंजुशिमा, औरत, कोहरे में युद्ध, दिल्ली दूर है (उपन्यास); मानसी गंगा, किस-किसको नमन करूँ (सम्पूर्ण निबन्धों के दो खण्ड); उत्तर योगी (महर्षि श्री अरविन्द की जीवनी); कीर्तिलता और अवहट्ठ भाषा, विद्यापति, आधुनिक परिवेश और नवलेखन, आधुनिक परिवेश और अस्तित्ववाद (आलोचना) आदि।

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