PABLO NERUDA : PREM KAVITAEN

Original Book/Language: 'पाब्लो नेरूदा : प्रेम कविताएँ'

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-348-3

Author:SURESH SALIL

Translation:विश्व कविता के शताब्दी पुरुष और सर्जनात्मकता का कीर्तिमान स्थापित करने वाले महाकवि पाब्लो नेरूदा (1904-1973) की प्रेम कविताओं की यह प्रस्तुति कवि की जन्मशती से संदर्भित मानी जा सकती है। पहले खंड में नेरूदा की अत्यंत प्रशंसित एवं लोकप्रिय काव्यकृति 'बीस प्रेम कविताएँ और विषाद का एक गीत' (अनु. मधु शर्मा) उसके सम्पूर्ण पाठ में लक्ष्य की जाएगी। दूसरे खंड में 'दि कैप्टेंस वर्सेस' की कुल 42 कविताओं में से 22 कविताएं ली गई हैं और तीसरे खंड में कवि के निधनोपरांत पहली बार प्रकाशित काव्यकृतियों में से चुनकर कतिपय कविताएँ दी गई हैं, जो मानव-प्रेम के विश्विक आयाम का एक सर्वथा मौलिक पाठ प्रस्तुत करती हैं। 'पाब्लो नेरूदा : प्रेम कविताएँ' अपनी तरह की एक विशिष्ट प्रस्तुति है, जो नेरूदा के काव्य-व्यक्तित्व के एक अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष को, कविता की शर्त पर, हिन्दी में पहली बार ला रही है।

Pages:128

MRP:Rs.150/-

Stock:In Stock

Rs.150/-

Details

'पाब्लो नेरूदा : प्रेम कविताएँ'

Additional Information

विश्व कविता के शताब्दी पुरुष और सर्जनात्मकता का कीर्तिमान स्थापित करने वाले महाकवि पाब्लो नेरूदा (1904-1973) की प्रेम कविताओं की यह प्रस्तुति कवि की जन्मशती से संदर्भित मानी जा सकती है। पहले खंड में नेरूदा की अत्यंत प्रशंसित एवं लोकप्रिय काव्यकृति 'बीस प्रेम कविताएँ और विषाद का एक गीत' (अनु. मधु शर्मा) उसके सम्पूर्ण पाठ में लक्ष्य की जाएगी। दूसरे खंड में 'दि कैप्टेंस वर्सेस' की कुल 42 कविताओं में से 22 कविताएं ली गई हैं और तीसरे खंड में कवि के निधनोपरांत पहली बार प्रकाशित काव्यकृतियों में से चुनकर कतिपय कविताएँ दी गई हैं, जो मानव-प्रेम के विश्विक आयाम का एक सर्वथा मौलिक पाठ प्रस्तुत करती हैं। 'पाब्लो नेरूदा : प्रेम कविताएँ' अपनी तरह की एक विशिष्ट प्रस्तुति है, जो नेरूदा के काव्य-व्यक्तित्व के एक अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष को, कविता की शर्त पर, हिन्दी में पहली बार ला रही है।

About the writer

SURESH SALIL

SURESH SALIL सुरेश सलिल(जन्म 19 जून 1942)हिन्दी के समर्थ कवि, आलोचक और साहित्यिक इतिहास के गहन अध्येता हैं। गणेश शंकर विद्यार्थी के कृतित्व और व्यक्तित्व पर अनेक प्रकाशनों के अतिरिक्त एक कविति संग्रह खुले में खड़े होकर प्रकाशित हुआ है। बच्चों व किशोरों के लिए भी इन्होंने कई किताबें प्रकाशित की हैं। श्री सलिल ने गणेशशंकर विद्यार्थी से संबंधित कई पुस्तकें लिखी हैं जिनमें उनकी जेल डायरी विशेष चर्चित रही। श्री सलिल ने विश्व की कई कालजयी कृतियों का अनुवाद भी किया है। गंगादासपुर, ज़िला उन्नाव, उत्तर प्रदेश है। कृतियाँ: खुले में खड़े होकर (1990) (कविता संग्रह),मेरा ठिकाना क्या पूछो हो (2004) (ग़ज़ल संग्रह), साठोत्तरी कविता: छह कवि (पाँच कवियों की सवक्तव्य कविताएँ),(1969),अनुवाद:मकदूनिया की कविताएँ (1992),अपनी जुबान में: विश्व की विभिन्न भाषाओं की कहानियाँ(1996),मध्यवर्ग का शोकगीत: जर्मन कवि हांस माग्नुस एंत्सेंसबर्गर की कविताएँ (1999),पढ़ते हुए (2000) दुनिया का सबसे गहरा महासागर: चेक कवि मिरोस्लाव होलुब की कविताएँ (2000),रोशनी की खिड़कियाँ : इकतीस भाषाओं के एक सौ बारह कवि (2003),देखेंगे उजले दिन: नाज़िम हिकमत की कविताएँ (2003),जापान : साहित्य की झलक (सहयोगी संकलन),मक़दुनिया की कविताएं (तनाव) श्रृंखला में प्रकाशित,अपनी जुबान में (विश्व की कई भाषाओं से चुनी हुई कहानियों का अनुवाद),उंगारेत्ती की अनूदित कविताएँ:प्राण-पीड़ा / उंगारेत्ती, कोई और रात / उंगारेत्ती, सितारे / उंगारेत्ती संपादित गणेशशंकर विद्यार्थी रचनावली: चार खंड,वली की सौ ग़ज़लें(2004),नागार्जुन: प्रतिनिधि कविताएँ (1999)।

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